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विकास दुबे मुठभेड़ मामले में उप्र पुलिस को सर्वोच्च न्यायालय की कमेटी ने दी क्लीन चिट

गैंगस्टर विकास दुबे और उसके पाँच साथियों के मुठभेड़ के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिल गई है। न्यायालय द्वारा गठित सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएस चौहान जाँच आयोग ने पुलिस के खिलाफ किसी भी सबूत के न मिलने पर क्लीन चिट दे दी है।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष 3 जुलाई को बिकरू गाँव में दुबे और उसके सहयोगियों द्वारा आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का बदला लेने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का षड्यंत्र रचने का आरोप लगा था। आयोग ने मामले की 8 महीने तक जाँच की और रिपोर्ट यूपी सरकार को सौंप दी है। अब रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कोई भी ऐसा चश्मदीद गवाह नहीं मिला है, चाहे वह मीडिया, नागरिक या यहाँ तक कि दुबे और उसके मारे गए गिरोह के सदस्यों के रिश्तेदारों से मिला हो, जो उत्तर प्रदेश पुलिस के फर्जी मुठभेड़ की बात को स्वीकार कर रहा हो। यहाँ तक कि कोई ऐसा सबूत भी नहीं मिला है। साक्ष्यों के अभाव में पुलिस को क्लीन चिट दे दी गई है।

बता दें कि विकास दुबे की मुठभेड़ के बाद हत्या के मामले की जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने तीन सदस्यीय जाँच आयोग गठित किया था। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार के प्रस्तावित नामों की स्वीकृति देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएस चौहान की अगुआई में पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश शशिकांत अग्रवाल की कमेटी बनाई गई थी।