समाचार
तबलीगी जमात प्रमुख मौलाना साद एक वर्ष बाद भी पुलिस की जाँच में नहीं हुए शामिल

गत वर्ष कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए अधिसूचित नियमों के उल्लंघन में नई दिल्ली के निज़ामुद्दीन क्षेत्र में एक सप्ताह तक चलने वाली धार्मिक मंडली आयोजित करने को लेकर तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के खिलाफ अप्रैल 2020 में दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें कई नोटिस जारी किए लेकिन वह एक वर्ष बाद भी अब तक जाँच में शामिल नहीं हुए।

31 मार्च को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तबलीगी जमात नेता मौलाना मोहम्मद साद और प्रसिद्ध निज़ामुद्दीन दरगाह के पास बंगलेवाली मस्जिद में संगठन के दिल्ली मुख्यालय के प्रबंधन से 6 अन्य लोगों के खिलाफ पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की थी।

देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी कोविड-19 के खतरे को देखते हुए मौलाना साद को मौखिक रूप से कई बार सूचित किया गया, जिसमें 24 मार्च 2020 को पुलिस स्टेशन में हुई एक बैठक भी शामिल थी।

एफआईआर में कहा गया कि उन्होंने जानबूझकर लापरवाही बरती और सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों की अवहेलना की। साथ ही यह भी आरोप है कि मौलाना साद और अन्य के नाम पर लिखित नोटिस जारी की गई थीं लेकिन तब भी उनकी अनदेखी की गई।