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कोलंबस की मूर्तियाँ अमेरिका में नस्लवाद के विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़ी गईं

अमेरिका के कई शहरों में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद नस्लवाद को लेकर तीव्र विरोध प्रदर्शन और हिंसा हो रही है। वहाँ पर उपनिवेशवाद और अश्वेतों की गुलामी को समर्थन देने वालों की मूर्तियों को हटाने की जोर-शोर से मांग की जा रही है। इसी बीच, बॉस्टन, मियामी और वर्जीनिया में क्रिस्टोफर कोलंबस की मूर्तियों को तोड़ दिया गया।

इटालियाई खोजकर्ता कोलंबस स्कूल की किताबों में एक नई दुनिया की खोज के लिए पढ़ाए जाते हैं। साथ ही कई लोगों द्वारा मूल अमेरिकियों के खिलाफ नरसंहार के प्रतीक के रूप में भी वह जाने जाते हैं। अमेरिकी मूल के कार्यकर्ताओं ने कोलंबस को सम्मानित करने के विरुद्ध लड़ाई लड़ी है। उनका कहना है कि अमेरिका में उनके अभियानों से पूर्वजों का नरसंहार किया गया था।

मिनेसोटा के सेंट पॉल में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कोलंबस की 10 फीट की कांस्य प्रतिमा के चारों और रस्सी फेंकी और मूर्ति को पत्थर की चौकी से खींचकर उखाड़ दिया गया।

स्थानीय पुलिस का कहना है कि बॉस्टन में कोलंबस की एक प्रतिमा को बुधवार (10 जून) को तोड़ दिया गया था।

एक अन्य कोलंबस की प्रतिमा को मियामी में उखाड़कर फेंक दिया गया। इसी तरह वर्जीनिया के रिचमंड में भी इसी सप्ताह कोलंबस की मूर्ति को एक तालाब में फेंक दिया गया था।

बुधवार (जून 10) की रात को रिचमंड, वर्जीनिया में कन्फेडरेट के अध्यक्ष जेफरसन डेविस की एक प्रतिमा के साथ भी तोड़फोड़ की गई।