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उत्तराखंड में चारधाम प्रबंधन मंडल होगा स्थापित, मुस्लिम मुख्यमंत्री नहीं हो सकेंगे अध्यक्ष

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता वाली उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड में चारधाम के प्रबंधन के लिए चारधाम मंदिर मंडल/श्राइन बोर्ड बनाने का निर्णय लिया है।

इस मंदिर मंडल को वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी मंडल की तर्ज़ पर ही विकसित किया जाएगा। मंत्रिमंडल की बैठक में 51 अन्य मंदिरों को भी शामिल किया गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया, “राज्य सरकार ने यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के प्रबंधन की देखरेख के लिए चारधाम तीर्थ प्रबंधन बोर्ड अधिनियम 2019 को लागू करने की योजना बनाई है।”

उत्तराखंड सरकार में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा, “एक बार गठित होने के बाद, राज्य का सीएम बोर्ड का अध्यक्ष होगा। बोर्ड में सदस्यों के रूप में चार सांसदों, छह विधायकों, कई सचिवों और चार धामों के पुजारियों को भी शामिल किया जाएगा।”

कौशिक के अनुसार उत्तराखंड सरकार ने ये कदम प्रमुख मंदिरों में सुविधाओं की बेहतरी के लिए उठाया है।

द पायनियर की रिपोर्ट में कहा गया, “मुख्यमंत्री बोर्ड का अध्यक्ष होगा और एक वरिष्ठ रैंकिंग का आईएएस अधिकारी बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) होगा। बोर्ड की बैठक साल में एक बार आयोजित की जाएगी और हितधारकों के अधिकार बरकरार रहेंगे।”

कौशिक ने आगे कहा, “यदि कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री होता है, तो एक वरिष्ठ हिंदू कैबिनेट मंत्री बोर्ड का अध्यक्ष होगा।”

प्रस्तावित विधेयक को इसी वर्ष के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।

हर किसी ने इस कदम का स्वागत नहीं किया और राज्य में पुजारियों के एक वर्ग से कुछ नाराज़गी के संकेत भी मिल रहे हैं।

केंद्र एवं प्रधानमंत्री मोदी के सहयोग से उत्तराखंड सरकार चार धामों तक बेहतर पहुँच और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के पक्ष में है।

देखना होगा कि यह कदम भाजपा समर्थकों और मतदाताओं को उत्तराखंड में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी कितना लुभाता है।