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उच्च न्यायालय ने दिया भ्रष्टाचार मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की जाँच का आदेश

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार (27 अक्टूबर) को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर पत्रकार द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में जाँच के आदेश दिए हैं। मामले की सीबीआई जाँच करेगी।

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार का आरोप है कि 2016 में जब रावत भाजपा के झारखंड प्रभारी थे, तब उन्होंने गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर घूस ली थी और राशि अपने रिश्तेदारों के खातों में भिजवाई थी।

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी ने पत्रकार उमेश शर्मा और शिव प्रसाद के खिलाफ दायर अलग-अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का भी आदेश दिया। अब राज्य सरकार विशेष अवकाश याचिका के साथ सर्वोच्च न्यायालय जाएगी।

एफआईआर एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर और देहरादून के एक कॉलेज प्रबंधक हरिंदर सिंह रावत के पुलिस से संपर्क किए जाने के बाद दर्ज की गई थी। उमेश द्वारा जून में फेसबुक पर अपलोड वीडियो के खिलाफ हरिंदर ने पुलिस से संपर्क किया था।

शिकायत में उमेश ने आरोप लगाया था कि हरिंदर की पत्नी सविता रावत, मुख्यमंत्री रावत की पत्नी की बहन हैं। 2016 में नोटबंदी के दौरान अमृतेश सिंह चौहान नाम के व्यक्ति ने विभिन्न बैंक खातों में कुछ राशि भेजी थी, जो उनकी पत्नी के नाम पर थी।

हरिंदर ने शिकायत में कहा कि उमेश ने अपने वीडियो में बैंक खातों में नकद जमा राशि से संबंधित जो दस्तावेज दिखाए हैं, वे झूठे हैं। पुलिस ने पूछताछ के बाद एफआईआर दर्ज की थी।