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अर्मेनियाई नरसंहार को अमेरिकी सीनेट ने दी पहचान, तुर्की ने माना “सबसे बड़ा अपमान”

अमेरिकी सीनेट ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है जो औपचारिक रूप से उस्मान राजवंश में अर्मेनियाई लोगों के खिलाफ हुईं सामूहिक हत्याओं को, “अर्मेनियाई नरसंहार”, के रूप में मान्यता देता है। अमेरिकी सीनेट द्वारा उठाया गया यह कदम अमेरिका व तुर्की के संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकता है।

गुरुवार (12 दिसंबर) को सिन्हुआ  समाचार एजेंसी ने डेमोक्रेटिक सीनेटर (सभासद) रॉबर्ट मेनेंडेज के हवाले से कहा, “अर्मेनियाई नरसंहार प्रस्ताव पारित कर अमेरिकी सीनेट आखिरकार इतिहास की पुष्टि के लिए खड़ी हुई है। 1915 से 1923 तक क्या हुआ? पूरी तरह से आश्वस्त है कि वह नरसंहार ही था।”

अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति द्वारा एक दिन पहले ही इस विधेयक को पूरी सीनेट के पास भेजा गया था।

अमेरिकी सीनेट का यह कदम डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को निर्देशित करता है कि वह तुर्की के खिलाफ सीरिया में उसके द्वारा चलाए गए सैन्य अभियानों और रूसी वायु रक्षा प्रणाली की खरीद के चलते उस पर प्रतिबंध लगाए।

इस प्रस्ताव को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा द्वारा अक्टूबर में ही पारित कर दिया गया था लेकिन रिपब्लिकन सभासदों ने व्हाइट हाउस के अनुरोध पर इसको अवरुद्ध कर दिया था क्योंकि व्हाइट हाउस को डर था कि इसके पारित होने से तुर्की क्रोधित हो जाएगा।

उस्मान राजवंश साम्राज्य के उत्तराधिकारी देश तुर्की ने दावा किया है कि बड़े पैमाने पर हुई हत्याएँ नरसंहार नहीं हैं।

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने “अर्मेनियाई नरसंहार” के अमेरिकी सदन द्वारा मान्यता देने को “बेकार” और तुर्की के लोगों के लिए “सबसे बड़ा अपमान” बताया है।

29 अक्टूबर को संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि सभा ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उस्मान राजवंश द्वारा अर्मेनियाई लोगों के प्रणालीगत जातीय विनाश और निष्कासन को नरसंहार के रूप में मान्यता देने के लिए 405-11 वोट के अंतर से मतदान हुआ।

(इस खबर को आईएएनएस की सहायता से प्रकाशित किया गया है।)