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अमेरिका की इस कार्रवाई से एफएटीएफ की बैठक से पहले बढ़ी पाकिस्तान की समस्या

अमेरिकी विदेश विभाग ने लश्कर-ए-तैयबा सहित 7 अन्य आतंकवादी समूहों की समीक्षा की और उन पर विदेशी आतंकवादी संगठन का तमगा बरकरार रखा। अमेरिका ने सबसे पहले 2001 में इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया था।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन का यह आदेश वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की अगले महीने होने वाली अहम बैठक से पूर्व आया है, जो प्रधानमंत्री इमरान खान सरकार को मुश्किल में डाल सकता है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखा हुआ है। इस वजह से दुनियाभर से देश को मिलने वाली आर्थिक मदद पर चोट पहुँची है।

पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति को लश्कर के जकी-उर-रहमान लखवी को उसके बैंक खातों से 1.5 लाख रुपये निकालने की अनुमति दिलवाने के हफ्तों बाद अमेरिका का यह आदेश आया है। गत वर्ष भी उसने लश्कर प्रमुख हाफिज़ सईद के लिए भी ऐसी ही रियायत हासिल की थी, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा नामित आतंकवादी है। अमेरिका ने अपने आदेश में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-झांगवी को भी विदेशी आतंकवादी संगठन की लिस्ट में शामिल किया है।

गत सप्ताह पाकिस्तान की एक न्यायालय ने लश्कर-ए-तैय्यबा के कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी को आतंकवाद से जुड़े वित्तपोषण मामले में 15 वर्ष जेल की सज़ा सुनाई थी। एक अन्य न्यायाधीश ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर का गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके लिए पाकिस्तान दावा करता रहा है कि वह कई वर्षों से देश में है ही नहीं। हालाँकि, पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों को भारत ने सिर्फ दिखावे वाली कार्रवाई बताया है।