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1919 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आए रॉलेट अधिनियम जैसा है सीएए- उर्मिला मातोंडकर

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में बॉलीवुड दो धड़ों में बटा हुआ है। सीएए के विरोध में अभिनेत्री और पूर्व कांग्रेस नेता उर्मिला मातोंडकर ने बयान देते हुए कहा कि 1919 के रॉलेट अधिनियम की तरह ही 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को इतिहास में काले कानून के रूप में जाना जाएगा।

लाइव हिंदुस्तान  की खबर के अनुसार महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मातोंडकर ने कहा, “1919 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने बाद अंग्रेज यह समझ गए थे कि हिंदुस्तान में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में उन्होंने रॉलेट अधिनियम जैसे कानून को भारत में लागू किया था। यह कानून काफी खतरनाक है। वर्ष 1919 के इस रॉलेट अधिनियम और 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को अब इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।”

“सीएए कानून गरीबों के खिलाफ हैं और वो गरीब कोई भी गरीब व्यक्ति हो सकता है। ऐसा एहसास दिलाया जा रहा है कि ये कानून मुसलमानों के खिलाफ है लेकिन उसके अलावा आज कहीं न कहीं 15 प्रतिशत मुसलमानों का डर 85 प्रतिशत हिंदुओं को बताकर उनपर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।”, उन्होंने आगे कहा।

आज तक की खबर के अनुसार महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के बारे में बात करते हुए मातोंडकर ने कहा, “एक बात मुझे लगता है कि आपको बतानी चाहिए जिस इंसान ने गांधीजी पर गोलियाँ चलाई थी वो इंसान कौन था, क्या वो इंसान मुसलमान था, क्या वो सिख या ईसाई था ? वो इंसान एक हिंदू था और अब इसके अलावा इस बारे में मैं यहाँ क्या कहूँ क्योंकि ये बात हम सबके लिए इतनी भयानक है। इस बात को हर दिन सुबह उठकर दिमाग में रखना इतना भयानक है कि इस बात में कई चीज़ें शामिल हैं।”