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गंगा एक्सप्रेसवे के लिए आगामी बजट में उत्तर प्रदेश सरकार आवंटित कर सकती है राशि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे के साथ आगे बढ़ रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस परियोजना को वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए राज्य के वार्षिक बजट में वित्तीय स्वीकृति मिलने की संभावना है।

इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश सात एक्सप्रेसवे वाला देश का एकमात्र राज्य बन जाएगा।

प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना लगभग 628 किलोमीटर लंबी है और पूरी होने पर देश में सबसे लंबी होगी। यह मेरठ से शुरू होगी जो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बहुत दूर नहीं है और हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ से होकर प्रयागराज में समाप्त होगी।

यदि सब कुछ योजना के अनुसार होता है तो आवश्यक बजट स्वीकृत होने के साथ ही इस वर्ष के अंत तक इस परियोजना पर काम शुरू होने की संभावना है।

सबसे पहले 2007 में मायावती सरकार द्वारा प्रस्तावित, परियोजना की पर्यावरण मंज़ूरी 2009 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा रद्द कर दी गई थी। न्यायालय ने यह तर्क दिया था कि प्रस्तावित संरेखण गंगा नदी के प्रणाल के बहुत करीब था। नदी प्रणाल के समीप निर्माण से नदी के बाढ़ के मैदानों को नुकसान होगा।

जनवरी 2019 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने परियोजना को पुनर्जीवित किया। पर्यावरण कानूनों के अनुपालन को आसान बनाने के लिए सरकार ने नदी प्रणाल से 10 किलोमीटर दूर एक्सप्रेसवे के संरेखण को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। अंतिम संरेखण, हालाँकि तब वापस पढ़ा नहीं गया था।

इस परियोजना पर 36,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसके लिए लगभग 6,556 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। जबकि एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहित करने पर 13,862 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि निर्माण पर 22,090 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह ऋण (70 प्रतिशत) और इक्विटी (30 प्रतिशत) के संयोजन से वित्त पोषित किया जाएगा।