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उत्तर प्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली भ्रष्टाचार में सबसे ऊपर, बिहार दूसरे स्थान पर

उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे पाटिल ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ देश भर में 31अक्टूबर तक 807 शिकायतें दर्ज की गई हैं जिसमें उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं।

मंगलवार को पाटिल ने लोकसभा में दिए अपने लिखित बयान में बताया कि उत्तर प्रदेश ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हुए घोटालों में 328 शिकायतों के साथ प्रथम स्थान पर रहा। जबकि पड़ोसी राज्य बिहार 108 शिकायतों के साथ दूसरा स्थान पर रहा।

उत्तर प्रदेश ने कई बार सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हुए घोटालों की वजह से सुर्खियाँ बटोरी हैं। वर्ष 2014 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को प्रदेश में हुए करोड़ों रुपये के अनाज घोटाले में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री राजा भैया की ज़मीन की जाँच का आदेश दिया था।

गोरखपुर से सांसद रवि किशन, आगरा से सांसद रामशंकर कठेरिया ने इन शिकायतों की पूरी जानकारी मांगी और यह भी पूछा कि भ्रष्टाचार कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए।

बता दें कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार के मामले में 78 शिकायतों के साथ दिल्ली तीसरे स्थान पर है जबकि पश्चिम बंगाल में 48 शिकायतें ही दर्ज हुई हैं।

मनीपुर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम वो राज्य हैं जिनमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।

इस व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने और निगरानी रखने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (2013) का एक संवैधानिक प्रावधान है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मंत्रालय इस पूरी व्यवस्था को राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की मदद से कंप्यूटरीकृत कर रही है। दर्शन केंद्र सरकार राशन कार्ड कार्ड को आधुनिक बनाकर पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को ही आधुनिक बनाने की तैयारी में है।

वहीं राशन की दुकानों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से पूरी व्यवस्था को स्वचालित करने की भी तैयारी है।