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लखनऊ में फिर लगाए गए सीएए प्रदर्शनकारियों के पोस्टर, ₹5000 के इनाम की घोषणा

लखनऊ प्रशासन ने फिर उन कार्यकर्ताओं की तस्वीरों के साथ पोस्टर लगाए हैं, जिन्होंने वर्ष की शुरुआत में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किया था।

गुरुवार (5 नवंबर) देर रात लगाए गए पोस्टरों में आरोपी व्यक्तियों के बारे में जानकारी देने वाले को 5,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की गई है।

आठ प्रदर्शनकारियों की तस्वीरों के साथ पोस्टर में उन्हें वांछित और भगौड़ा घोषित किया गया है। साथ ही उनके नाम और पते भी दिए गए हैं। शहर के पुराने क्षेत्र में लाउडस्पीकर से उनके बारे में घोषणा भी की गई।

आरोपियों में से एक शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास हैं। इसके अलावा आठ आरोपियों में मोहम्मद आलम, मोहम्मद ताहिर, रिजवान, रफत अली, अहसन, इरशाद, हसन और इरशाद हैं। उन पर सीएए के खिलाफ दिसंबर 2019 में प्रदर्शन के दौरान हिंसा का आरोप है।

सभी आरोपी ठाकुरगंज क्षेत्र के हैं। पोस्टरों में क्षेत्र के पुलिस स्टेशन के अधिकारियों के नंबर भी दिए गए हैं, ताकि उन्हें सूचना मिल सके। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत मामला दर्ज हुआ है।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “प्रदर्शनकारी 2019 में सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल थे और तब से फरार थे। उनकी तस्वीरें हर जगह लगाई गई हैं। आरोपियों के घरों के पास पोस्टर और नोटिस भी लगाए गए हैं।”

न्यूज़-18 ने रिपोर्ट में कहा था कि पुलिस के अनुसार, इन सभी ने 19 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और हिंसा भड़काई थी। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और काफी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा था।

इस साल की शुरुआत में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लखनऊ प्रशासन को आरोपियों की होर्डिंग्स को हटाने का निर्देश दिया था। इसके बाद सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, जहाँ मामला लंबित है।