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यूएनएससी में चीन का नाम लिए बगैर भारत बोला, “आतंकवाद पर कार्रवाई में बाधा न बनें”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में चीन का नाम लिए बगैर कटाक्ष करते हुए भारत ने गुरुवार (19 अगस्त) को कहा कि देशों को आतंकवादियों को नामित करने के अनुरोध के मार्ग पर बिना किसी कारण के अवरोध उत्पन्न नहीं करना चाहिए। आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएनएससी में आतंकवादी कृत्यों की वजह से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरे पर कहा, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय समान विचार रखता है कि आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा होनी चाहिए। इसमें कोई अपवाद नहीं हो सकता है, ना ही किसी आतंकवादी गतिविधि को उचित ठहराया जा सकता है। भले ही उसके पीछे मंशा कुछ भी हो। हमें इस बुराई से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।”

इस वर्ष जनवरी में यूएनएससी में अपनी उस टिप्पणी की ओर भी एस जयशंकर ने संकेत दिया, जब उन्होंने आतंकवाद के संकट को सामूहिक रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से आठ सूत्रीय कार्य योजना का प्रस्ताव रखा था।

उन्होंने कहा, “राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत करें। आतंकवाद को न्यायसंगत ना बताएँ। आतंकवादियों का महिमामंडन ना करें, दोहरा मानदंड ना अपनाएँ। आतंकवादी, आतंकवादी होते हैं। उनमें अंतर कर हम सिर्फ अपने कष्ट बढ़ाएँगे। बिना किसी कारण के अनुरोध के रास्ते में बाधा उत्पन्न ना करें।”

वहीं, पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “हक्कानी नेटवर्क की बढ़ी गतिविधि चिंता का विषय है। चाहे अफगानिस्तान में हो या भारत के विरुद्ध लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों को प्रोत्साहन और छूटें मिल रही हैं। जिनके हाथों पर निर्दोषों का रक्त है, उन्हें राज्य का आतिथ्य मिल रहा है। इस दोहरी नीति पर बोलने से हमें कभी भयभीत नहीं होना चाहिए।”