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बजट में रेलवे के निजीकरण रोडमैप से खुश नहीं कर्मचारी, 10 जुलाई से करेंगे प्रदर्शन

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन (एनएफआईआर) का दावा है, “केंद्रीय बजट में रेलवे के व्यवसायीकरण और निजीकरण का एनडीए सरकार ने रोडमैप पेश किया है। इससे हम कतई खुश नहीं हैं। इस कदम के खिलाफ हमारे सहयोगी देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने जा रहे हैं।”

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में प्रस्तावित किया था कि रेलवे को तेज विकास, रोलिंग स्टॉक निर्माण और माल की डिलीवरी के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल का उपयोग करना चाहिए।

वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा था, “2018 से 2030 के बीच रेलवे को स्वीकृत परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 50 लाख करोड़ रुपये की ज़रूरत होगी।”

एनएफआआईआर के महासचिव एम. राघवैया ने सभी रेलवे यूनियनों के महासचिवों को लिखे पत्र में कहा, “बजट से व्यवसायीकरण और निजीकरण को जोर शोर से बढ़ावा देने की सरकार की मंशा उजागर हो गई है। रेलवे कार्यबल इसे लेकर जोरदार प्रदर्शन करेगा।” एनएफआईआर ने अपने सभी सहयोगियों को 10 से 13 जुलाई तक विरोध प्रदर्शन करने को कहा है।

पिछले महीने ही ऑल इंडिया रेलवेमैन फेडरेशन (एआईआरएफ), एनएफआईआर और रेलवे मजदूर संघ (आरएमएस) सहित कई यूनियन ने रेलवे की 7 उत्पादन इकाइयों को कॉरपोरेट करने के सरकार के विचार के खिलाफ औद्योगिक अशांति की धमकी दी थी।