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प्रहलाद सिंह पटेल ने भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची जारी की

राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्यों की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) संपत्तियों के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से सरकार ने शनिवार (18 अप्रैल) को नई दिल्ली में भारत की आईसीएच सूची जारी की।

इस दौरान पर्यटन और संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा, “भारत में अनोखी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत परंपराओं का भंडार है। इनमें से 13 को यूनेस्को ने मानवता के आईसीएच के रूप में भी मान्यता दी है।”

उन्होंने संस्कृति मंत्रालय के विज़न-2024 की पहल के बारे में बताया कि आईसीएच सूची अपनी अमूर्त विरासत में मौजूद भारतीय संस्कृति की विविधता को पहचानने का एक प्रयास है।

आईसीएच की सुरक्षा के लिए यूनेस्को के 2003 अभिसमय का अनुसरण करते हुए इस सूची को पाँच क्षेत्रों में बाँटा गया है। इनमें मौखिक परंपराएँ और अभिव्यक्तियाँ हैं, जिसमें अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के वाहन के रूप में भाषा भी शामिल है, प्रदर्शन कलाएँ, सामाजिक प्रथाएँ, रीति-रिवाज, उत्सव कार्यक्रम, प्रकृति व संसार से संबंधित ज्ञान और पारंपरिक शिल्पकारिता है।

उन्होंने बताया कि भारत की परंपरा और संस्कृति न केवल प्राचीन है बल्कि अमूल्य भी है। वर्तमान संकट में जहाँ दुनिया और हमारा देश कोविड-19 महामारी से निपट रहा है, ऐसे में यह हमारी विरासत की मानवता और सत्कार को परिभाषित करता है और हमें बताता है कि हम क्या हैं।

उन्होंने श्लोक वसुधैव कुटुम्बकम् के महाउपनिषद से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह भारत की आत्मा और विनम्रता को प्रदर्शित करता है कि किस तरह भारत में फंसे सभी पर्यटकों की मदद के लिए भारत आगे आ रहा है।

उन्होंने कहा, “प्राचीन भारत में धर्म के सिद्धांत विज्ञान पर आधारित थे।” उन्होंने गुजरात के मोढ़ेरा में सूर्य मंदिर के 52 स्तंभों का जिक्र करते हुए अपनी बात रखी, जिसके प्रत्येक स्तंभ में एक वर्ष में एक सप्ताह दर्शाया गया है। यह केवल हमारा अज्ञान है, जो हमें भारत के दर्शन और परंपराओं के ज्ञान को समझने की अनुमति नहीं देता है।