समाचार
केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद उर्वरक निर्माताओं ने नहीं बढ़ाई पोषक तत्वों की कीमत

भारत के सबसे बड़े उर्वरक विक्रेता भारतीय किसान उर्वरक सहकारी (इफको) ने हाल ही में अपनी आंतरिक सूचना में उल्लेख किया था कि पोषक तत्वों की लागत में 58 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। हालाँकि, केंद्र सरकार ने किसानों को भरोसा दिया था कि वे उर्वरक निर्माताओं के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करने के बाद पहले की दरों में ही पोषक तत्वों को देना जारी रखेंगे।

केंद्रीय आर्थिक और उर्वरक राज्यमंत्री मनसुख मंडाविया के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स ने लिखा, “उर्वरक कंपनियों ने डीएपी, एमओपी और एनपीके जैसे पोषक तत्वों की कीमतों में वृद्धि की थी। सरकार ने इन कंपनियों के साथ बैठक के बाद मूल्य वृद्धि को रोकने का निर्णय किया है। किसानों को ये उर्वरक वर्तमान कीमतों पर ही मिलते रहेंगे।”

कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी यूएस अवस्थी ने कहा, “इफको ने साफ कर दिया है कि उनके पास अब भी 11.26 लाख टन जटिल उर्वरक हैं, जिन्हें वे पुरानी दरों पर बेचेंगे। नई दरों वाली सामग्री बिक्री के लिए नहीं है।”

प्रत्यक्ष रूप से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में पाँच से छह महीने में बड़े पैमाने पर उछाल आया है और गैर-यूरिया उर्वरकों पर घोषित 58 फीसदी वृद्धि को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। वास्तव में डीएपी की कीमत में वैश्विक स्तर पर 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, पोषक तत्वों जैसे पोटाश, लवण, सल्फर, अमोनिया आदि में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।

किसानों ने पहले ही बीज, कीटनाशकों और डीजल की उच्च कीमतों की शिकायत की है, जिसकी वजह से इस मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए सरकार को आगे आना पड़ा।