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जातीय जनगणना हेतु नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार के कई दल प्रधानमंत्री मोदी से मिले

जातीय जनगणना की मांग को लेकर एकजुटता दिखाते हुए सोमवार (23 अगस्त) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार के पक्ष-विपक्ष के विभिन्‍न दलों का 11 सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला। बिहार के मुख्यमंत्री ने बताया, “प्रधानमंत्री ने हमारी बात सुनी है। उम्मीद है कि वे विचार करेंगे। इस पर सभी दल एकमत हैं।”

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नीतीश कुमार ने आगे कहा, “बिहार विधानसभा में जातीय जनगणना पर 2019 और 2020 में प्रस्ताव पारित किया गया था। एक मंत्री ने बयान दिया था कि जातीय आधारित जनगणना नहीं हो पाएगी। इससे लोगों के मन में शंका पैदा हो गई। बिहार के साथ पूरे देश के लोग इस पर एक राय रखते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री से विचार करने का आग्रह किया, जिसे उन्‍होंने खारिज नहीं किया है।”

प्रधानमंत्री से भेंट के बाद तेजस्वी यादव ने कहा, “राष्‍ट्रहित में हम सभी दलों के लोग एक साथ हैं। जब जानवरों व पेड़-पौधों की गिनती होती है, तब इंसानों की क्‍यों नहीं होनी चाहिए? आपके पास वैज्ञानिक आँकड़ा नहीं है तो आप योजनाएँ कैसे बना सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने केवल बिहार नहीं बल्कि पूरे देश में जातीय जनगणना को लेकर भेंट की है। अब प्रधानमंत्री के निर्णय की प्रतीक्षा है।”

प्रतिनिधिमंडल में जनता दल यूनाइटेड का प्रतिनिधित्व शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा का जीतन राम मांझी, विकासशील इनसान पार्टी का पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री मुकेश साहनी, आरजेडी का तेजस्वी यादव, भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी माले का महबूब आलम, भाकपा का रामरतन सिंह, माकपा का अजय कुमार, कांग्रेस का अजीत शर्मा, भाजपा का मंत्री जनक राम ने प्रतिनिधित्व किया।