समाचार
दो हफ्तों बाद हम क्या जानते हैं गौ हत्या पर हुई बुलंदशहर हिंसा के बारे में

आशुचित्र- 3 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के कुछ गाँवों के लोगों व कुछ हिंदू संगठनों ने गौ हत्या के विरुद्ध प्रदर्शन किया था। एक पुलिस अफसर व एक नागरिक की इस घटना में मौत हो गई। दो हफ्तों बाद दोषियों की गिरफ्तारी अभी भी शेष है व साजिश सुलझने से कोसों दूर है।

कहा जा रहा है कि बुलंदशहर की वह घटना जिसमें एक पुलिस अधिकारी व एक नागरिक की जान चली गई, एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। पहली दृष्टि में देखने पर लगता है कि मैदान में प्रदर्शित गायों के कंकालों को देखकर हिंदू संगठनों के साथ कुछ आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस चौकी पर धावा बोला। जब पुलिस ने भीड़ को विसर्जित करने के लिए हवाई फायरिंग की, एक स्थानीय युवक की मौत हो गई और गुस्साई हुई भीड़ पुलिस पर टूट पड़ी जिसमें सियाना इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह मारे गए।

लेकिन बुलंदशहर जिले में सियाना तहसील के महौ, चिंगरावती और नयाबांस गाँवों के लोगों, आरोपियों और गवाहों से बातचीत व चल रही जाँच-पड़ताल से पता लगा है कि यह मामला बेहद पेंचीदा है। सामने आई बातें किसी षड्यंत्र की ओर संकेत करती हैं लेकिन क्यों और किसके द्वारा, यह अभी भी एक रहस्य है।

चिंगरावती पुलिस चौकी के बाहर जलाए गए वाहन

विशेष जाँच दल इस बात की जाँच कर रहा है कि हिंसा क्यों हुई और क्यों अन्य पुलिसकर्मियों ने सुबोध कुमार को अकेला छोड़ दिया। इसके साथ गिरफ्तारियाँ भी की जा रही हैं। इस मामले में तीन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

अभी तक मामला यह है-

गौ कंकालों की खोज

स्थानीय मीडिया ने बताया कि जब 3 दिसंबर को मजदूर महौ गाँव के एक निवासी व पूर्व प्रधान राजकुमार चौधरी के खेत पर गए तो उन्हें गन्नों से लटके हुए गौ कंकाल दिखे। ग्रामीणों में आक्रोश यहाँ से उत्पन्न हुआ और यह गुस्सा हिंसा में तब परिवर्तित हो गया जब कथित तौर पर पुलिस ने कोई भी कदम उठाने में शिथिलता दिखाई।

सियाना के तहसीलदार राज कुमार भास्कर जो घटना स्थल पर पहुँचने वाले पहले पुलिसकर्मियों में से एक थे ने मीडिया को बताया, “गन्ने के खेत में मृत गाय का मांस लटक रहा था। उसका सर व खाल ऐसे लटके थे जैसे हैंगर (खूँटी) पर कपड़े। यह अजीब है क्योंकि राज्य में परिस्थिति जानते हुए यदि कोई गौ हत्या करेगा तो इस प्रकार प्रदर्शित नहीं करेगा। यह दूर से ही दिख रहा था।”

जिस ट्रॉली में गौ कंकाल ले जाया गया था, वह अब भी पुलिस चौकी के बाहर खड़ी है

हालाँकि जल्दबाजी में इस निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि उत्तेजित करने के लिए यह गौ हत्यारों द्वारा ही यह किया गया होगा लेकिन इस मामले को योगेश राज द्वारा गौ हत्या के लिए दर्ज की गई एफआईआर का एक कथन इसे और भयावह बनाता है। 22-वर्षीय राज कानून का छात्र है व बुलंदशहर जिले की बजरंग दल ईकाई का संचालक है। उसके कथन ने इस मामले में हिंदू संगठनों की भूमिका पर एक बड़ा प्रश्न चिह्न लगा दिया है।

उसने कहा कि सुबह 9 बजे के आसपास जब वह एक समूह के साथ महौ गाँव के खेत में जा रहा था, तब उसने नयाबांस गाँव के सात लोगों को गौ हत्या करते हुए देखा और देखे जाने पर वे भाग गए। एफआईआर में उसने दोषियों का नाम भी बताया है।

यह कथन कहीं से नहीं जुड़ता है। पुलिस ने बताया है कि कंकाल लगभग 48 घंटे पुराना था व जैसा कहा जा रहा है उसके विपरीत सुबह गौ हत्या नहीं हुई थी। दूसरा यह कि राज कुमार के परिवारजनों ने बताया कि उन्होंने सुबह 7-8 बजे कंकाल देखे थे। एफआईआर में दर्ज किए गए सात मुस्लिम युवकों में से दो नाबालिग हैं और कथित तौर पर दस साल पहले ही बुलंदशहर से चले गए थे। चौथा, योगेश के रिश्तेदार ने बताया कि वह कंकालों की बात पता चलने के बाद महौ गया था, यह भी योगेश के कथन के विपरीत है।

योगेश राज व चौधरी, दोनों पर हिंसा का आरोप है और वे फरार हैं।

कुछ रिपोर्टों से हिंदू संगठनों पर शक की सुई आ गई है और ऐसा लग रहा है कि गौ कंकाल रखने में उनका हाथ था और हिंसा सुनियोजित थी।

कैसे भड़की हिंसा?

तहसीलदार भास्कर के अनुसा, हिंदू संगठनों के कुछ लोग 9:30 बजे आए और उन्होंने शवों को ट्रॉली में डाला।

वहीं हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने सभी आरोपों का खंडन किया है। हिंसा के आरोपी शिखर अग्रवाल ने एक वीडियो संदेश जारी किया है जिसमें उसने मारे गए पुलिस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह को ग्रामीणों के रोष का कारण बताया है। उल्लेखनीय है कि शिखर सियाना में भाजपा की युवा इकाई से जुड़ा हुआ है। उसने कहा कि सिंह ने उसे तथा उसके सहयोगियों को गाय के अवशेष चिंगरावती पुलिस थाने ले जाने से रोका था। अग्रवाल के अनुसार सिंह ने उसे तथा उसके साथियों को मारने की धमकी भी दी थी। कहा जा रहा है कि सिंह उस स्थल पर बाद में पहुँचे थे लेकिन अग्रवाल ने कहा कि सिंह वहाँ शुरुआत से मौजूद थे।

नयाबांस गाँव जहाँ शिकायतकर्ता व आरोपी योगेश राज रहता है

वहीं आरोपी योगेश राज ने भी पिछले सप्ताह वीडियो जारी किया था जहाँ उसने खुद के निर्दोष होने की बात कही थी। उसने कहा था कि सिंह तथा सुमित की मौत प्रदर्शन वाले स्थल से अलग जगह हुई थी।

वहीं भाजपा की राज्य इकाई ने विपक्ष की पार्टियों पर शव को गलत तरीके से डालने तथा शांति भंग करने के प्रयास का आरोप लगाया है।

इस घटना के एक सप्ताह बाद हिंदी दैनिक अमर उजाला  ने एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की पुलिस एजेंसी द्वारा हिंसा के कारण का पता लगाने की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गाय के शव वाले स्थल पर पुलिस का समय पर न पहुँच पाना इतनी बड़ी हिंसा का प्रमुख कारण रहा। रिपोर्ट के अनुसार मंडल अधिकारी तथा उप-प्रभागीय मजिस्ट्रेट स्थल पर सुबह 9:30 बजे पहुँचे थे लेकिन वे गुस्साए ग्रामीणों को शवों को ट्रॉली पर लादने से तथा पुलिस थाने ले जाने नहीं रोक सके। यदि पुलिस समय पर पहुँचती तथा प्रदर्शनकारियों को शव लेने से रोक लेती तो हिंसा रोकी जा सकती थी। बता दें कि इस मुद्दे पर एफआईआर 12:43 बजे दर्ज की गई थी।

मारे गए अफसर सुबोध कुमार

उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक ओपी सिंह ने मीडिया में बताई जा रही बातों से थोड़ी अलग बातें कहीं। पुलिस अपनी जाँच गाय की हत्या पर क्यों केंद्रित कर रही है, पूछे जाने पर उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया  को बताया कि पहले एक प्रतिरूप रहा है जो चिंता का विषय है।

यह प्रतिरूप गाय की हत्या की छः घटनाओं से बनता है जिनमें गुलावठी, अरनिया, खुर्जा तथा औरंगाबाद की घटनाएँ जिनमें कावड़ यात्रा के दौरान 21 गाय थी आदि शामिल हैं। सिंह ने मीडिया को बताया कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस की सालगिरह के तीन दिन बाद गाय के शवों का मिलना साजिश की तरह लगता है। हालाँकि बुलंदशहर की हिंसा पर उन्होंने किसी भी समुदाय अथवा संगठन पर शक होने के बारे में कुछ नहीं कहा।

हिंसा जिसमें दो जानें गईं

मोबाइल द्वारा की गई रिकॉर्डिंग बताती है कि गाय के अवशेष लादे एक ट्रॉली 7 किलोमीटर दूर चिंगरावती पुलिस चौकी पहुँची थी। यह वही वक़्त था जब बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग तब्लीगी इज्तिमा से होकर बुलंदशहर-गढ़ मुक्तेश्वर राज्य मार्ग से निकलने वाले थे। तब्लीगी इज्तिमा तीन दिनों का सम्मेलन था। वीडियो में दिखाया जा रहा है कि भीड़ ने पुलिस चौकी पर पथराव भी किया तथा वहाँ खड़े कई वाहनों में आग लगा दी।

सुमित के पिता अमरजीत सिंह (दाएँ से दूसरे), मीडिया से वार्ता करते हुए

कई स्रोतों से पता चला है कि इस घटना में सबसे पहले शिकार चिंगरावती गाँव का रहवासी सुमित चौधरी हुआ था। अख़बारों में उसकी उम्र 20 से 22 लिखी गई है लेकिन स्वराज्य  को सुमित के परिजनों ने उसकी उम्र महज़ 17 बताई है तथा यह भी कहा कि वह सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। सुमित की मौत गोली लगने से हुई थी। उसके पिता अमरजीत सिंह ने बताया कि वह ग़ाज़ियाबाद में पढ़ता था और अवकाश में चिंगरावती आया था। उन्होंने कहा कि वह अपने दोस्त को बस स्टैंड छोड़ने गया था, वहीं पर वह हिंसा का शिकार हुआ। परिवार का कहना है कि सुमित को सुबोध कुमार सिंह ने मारा था साथ ही उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि जो एफआईआर वह दर्ज करवाना चाहते थे उससे अलग लिखी गई है। बता दें कि इस मुद्दे में सुमित की मौत से संबंधित एफआईआर, गाय के शव की एफआईआर तथा सुबोध कुमार सिंह की मौत की एफआईआर के बाद लिखी गई है।

राज्य सरकार ने परिजनों को 10 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है लेकिन परिवार ने सुमित का नाम आरोपियों की सूची से हटाने की माँग करते हुए योगी आदित्यनाथ के आवास के सामने आत्मदाह की चेतावनी दे दी है।

हालाँकि वीडियो में स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि सुमित ने पुलिस चौकी पर ईंट और पत्थर फेंके थे।

सुमित के मौत का रहस्य बरकरार है वहीं सुबोध कुमार सिंह के हत्यारे भी नहीं पकड़ में आ सके हैं। यह पता चला है कि सुमित और सुबोध दोनों ही 0.32 बोर की पिस्तौल से मारे गए हैं जो कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उपयोग नहीं की जाती है। सुबोध कुमार सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि उनकी मौत सिर में गोली लगने के कारण हुई है। डॉक्टर का कहना है कि उन्हें छ:-सात फीट की दूरी से मारा गया है।

योगेश का घर

पिछले सप्ताह पुलिस ने शक के आधार पर एक सैनिक जीतेंद्र मालिक उर्फ़ जीतू फौजी को हिरासत में लिया था। वहीं पूछताछ में उसके घटना में शामिल होने के कोई सबूत नहीं मिल सके हैं। अभी तक पुलिस ने असली आरोपियों को नहीं पकड़ा है तथा 0.32 बोर की पिस्तौल भी बरामद नहीं की है।

अभी तक की जाँच

पुलिस ने 17 लोगों को हिरासत में लिया है। घटना के दौरान लिए गए मोबाइल वीडियो जाँच-पड़ताल में विशेष रूप से सहायक सिद्ध हो रहे हैं। शनिवार को पुलिस ने 21 फरार लोगों की तस्वीरें जारी की हैं। इसमें योगेश राज, शिखर अग्रवाल तथा विश्व हिंदू परिषद कार्यकर्ता उपेंद्र राघव भी शामिल हैं।

बुलंदशहर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अवधेश पांडे ने इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। साथ ही पुलिस को इनकी संपत्ति जब्त करने के आदेश भी दे दिए गए हैं। मंगलवार सुबह तक 23 में से दो आरोपियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। वहीं मुख्य आरोपी योगेश राज अभी भी फरार है।

पुलिस की रिपोर्ट से स्पष्ट नज़र आता है कि उनकी जाँच गाय के वध पर केंद्रित है जो कि इस घटना का मुख्य कारण है। पुलिस ने गैर कानूनी ढंग से हो रही गौ हत्या तस्करी के विरुद्ध राज्य में कई जगह छापे मारे हैं। उल्लेखनीय है कि पुलिस ऐसे गाँवों में बैठक भी ले रही है, जो इन घटनाओं के लिए जाने जाते हैं तथा ग्रामीणों को इसमें शामिल न होने की बातें समझा रही है।