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संस्कृत को बोलचाल की भाषा बनाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के गाँव

भारतीय भाषाओं के पुनरुद्धार और संरक्षण के उद्देश्य से मानव संसाधन विकास मंत्रालय नई योजना बना रहा है। उसका उद्देश्य केंद्रीय संस्थानों द्वारा पास के कम से कम दो गाँवों में संस्कृत को बोलचाल की भाषा बनाने और उसका संरक्षण करने का है।

इंडिया टुडे  की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय भाषा संस्थानों के प्रमुखों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा, “इन भाषा संस्थानों को मौलिक रूप से मज़बूत और कुशल होना चाहिए। भारतीय भाषाओं को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने के लिए सभी रिक्तियों को भरने की आवश्यकता है।” उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों को नियमित रूप से इन संस्थानों के प्रमुखों से मिलने का निर्देश दिया।

पोखरियाल ने संस्कृत को संरक्षित करने और नए आयामों पर पहुँचाने के लिए योग्य संस्कृत शिक्षकों व प्रोफेसरों को साथ जोड़ने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “मंत्रालय की ओर से सभी भाषाओं में आपसी तालमेल के लिए भाषा भवन तैयार किया जाए। इससे सभी भाषाओं में होने वाले कार्यों का अनुवाद कर सभी भाषाओं के लोगों तक उसे पहुँचाया जा सकेगा। इसके अलावा, भाषा भवन में बहुभाषी लोग साथ मिलकर राष्ट्र की भाषाओं के विकास की दिशा में काम करेंगे।”

अब तक दिल्ली में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ और तिरुपति में राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित केंद्रीय संस्थान हैं।