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इसरो की देश के नए तूतीकोरिन अंतरिक्ष तट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आने वाले वर्षों में और अधिक प्रक्षेपण गतिविधियों के लिए कमर कस ली है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे में तमिलनाडु में भारत के दूसरे रॉकेट लॉन्चिंग पैड पर काम शुरू हो गया है।

केंद्रीय अंतरिक्ष विभाग के मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा को सूचित किया था कि सरकार के पास तमिलनाडु में कुलासेकरपट्टिनम के पास एक रॉकेट लॉन्चिंग पैड स्थापित करने का प्रस्ताव है।

रिपोर्ट के अनुसार, इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने पुष्टि की, “तमिलनाडु में दूसरे भारतीय अंतरिक्ष तट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि अंतरिक्ष पर काम करने वाले प्रमुख देशों के पास कई रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र हैं।”

इसरो प्रमुख ने कहा, “नया लॉन्च पैड मुख्य रूप से नए विकसित स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) के प्रक्षेपण को पूरा करेगा। शुरुआत में एसएसवीवी के प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से किए जाएँगे। हालाँकि, एक बार दूसरा अंतरिक्ष तट पूरा हो जाने के बाद प्रक्षेपण वहाँ स्थानांतरित कर दिया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “एसएसएलवी का पहला प्रक्षेपण “पेलोड-लिफ्टिंग क्षमता 500 किग्रा के आसपास है, जो 2020 की पहली तिमाही में होने वाला है।” बाद में मांगों के आधार पर अन्य रॉकेटों को प्रस्तावित अंतरिक्ष तट से भी प्रक्षेपित किया जा सकता है।”

नये अंतरिक्ष तट के फायदों में सीधे दक्षिणमुखी प्रक्षेपण शामिल है। टीएन अंतरिक्ष तट भी पीएसएलवी के माध्यम से उपग्रहों को ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करने के लिए आदर्श होगा। तूतीकोरिन अंतरिक्ष तट के लिए भूमि की आवश्यकता लगभग 2,300 एकड़ में होगी।

प्रस्तावित तूतीकोरिन अंतरिक्ष तट आदर्श रूप से केरल में श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश और थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन के अलावा भारत का तीसरा प्रक्षेपण केंद्र होगा। हालाँकि, हाल ही में थुम्बा से कोई बड़ा रॉकेट प्रक्षेपित नहीं किया गया है।