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आइवरमेक्टिन के समय पर उपयोग से उत्तर प्रदेश में संक्रमण व मृत्यु दर रही बेहद कम

योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया कि वह पहला राज्य है, जिसने आइवरमेक्टिन दवा का बड़े पैमाने पर उपयोग रोगनिरोध और चिकित्सा के लिए शुरू किया। इस दवा ने कोविड-19 महामारी के बीच संक्रमण और मृत्यु दर को कम करने में मदद की।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गत वर्ष अप्रैल-मई में आगरा में कोरोना संक्रमण के कई मामले निकलने के बाद राज्य प्रशासन ने आइवरमेक्टिन और डॉक्सीसाइक्लिन दोनों दवाओं को कोविड मरीजों और उनके उपचार के लिए शुरू किया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 अगस्त 2020 को एक आदेश पारित किया था, जिसमें स्वास्थ्य कर्मियों और कोविड-19 के सकारात्मक मरीजों के संपर्क में आने वालों को इसके उपयोग की अनुमति दी थी। साथ ही संक्रमित मरीजों के उपचार में भी इसके उपयोग के लिए निर्देशित किया था।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में राज्य निगरानी अधिकारी विकेंदु अग्रवाल के हवाले से कहा गया, “उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य था, जिसने बड़े पैमाने पर रोगनिरोध और चिकित्सीय उपयोग की शुरुआत के लिए आइवरमेक्टिन का उपयोग शुरू किया था। मई-जून 2020 में डॉ अंशुल पारिक के नेतृत्व में आगरा की एक टीम ने प्रायोगिक आधार पर जिले के सभी आरआरटी ​​टीम के सदस्यों को प्रायोगिक आधार पर इसे देने के लिए कहा था।”

उन्होंने कहा, “यह देखा गया कि उनमें से कोई भी संक्रमित मरीज के साथ दैनिक संपर्क में रहने के बावजूद कोविड-19 से संक्रमित नहीं हुआ था। उत्तर प्रदेश सबसे अधिक जनसंख्या और घनत्व वाला राज्य है लेकिन फिर भी यहाँ संक्रमण की दर प्रति 10 लाख मामलों में बेहद कम बनाए रखने में सफल रहे क्योंकि यहाँ आइवरमेक्टिन का उपयोग शुरू कर दिया गया था।”