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हजारों प्रवासी श्रमिक स्थानीय लोगों की धमकियों के बाद घाटी छोड़ने को मजबूर

केंद्र सरकार के जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के निर्णय के बाद बिहार के हजारों प्रवासी श्रमिक, जो राज्य में मौसम के मुताबिक मजदूरी कर रहे थे, वे घाटी के स्थानीय लोगों की धमकियों की वजह से क्षेत्र से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।

ओपन पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, 56 वर्षीय दिहाड़ी श्रमिक सुरिंदर महतो ने बताया, “वे मुझे गालियाँ दे रहे थे। यह भी कह रहे थे कि मार देंगे।” 7 अगस्त को सुबह 11.15 बजे तक ऐसे प्रवासी श्रमिकों को ले जाने वाली 40 बसें पहले ही घाटी से जम्मू के लिए रवाना हो चुकी थीं। हजारों लोग सुरक्षा के लिए जम्मू की ओर भाग गए थे।

उच्च मजदूरी अर्जित करने की संभावना के कारण प्रवासी श्रमिक मुख्यत: गर्मियों के दौरान ठंड के मौसम में घाटी आते हैं। उनमें से अधिकांश एक दिन के काम के लिए लगभग 500-600 रुपये कमाते हैं।

कुछ मजदूरों ने कहा, “घाटी छोड़ने के लिए धमकाया जा सके इसलिए हमारे ऊपर पत्थर भी फेंके गए।” कुछ श्रमिकों का यह भी कहना है कि उनकी मजदूरी अवैतनिक है लेकिन वे अपने जीवन की सुरक्षा के डर से घाटी छोड़ने के लिए मजबूर हैं।