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पेटेंट दायर करने में भारत की 27 प्रतिशत बढ़ोतरी, आईआईटी का भी रहा योगदान

भारत ने 2018 में 2000 से ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय अधिकार पत्र (पेटेंट) के आवेदन दायर किए हैं। 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत पहले और 21 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ चीन दूसरे नंबर पर रहा। मध्यम आय वाले भारत और चीन कथित रूप से शीर्ष 15 देशों में अपनी जगह बनाने वाले देश बन गए हैं।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस  की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की 2018 वैश्विक बौद्धिक संपदा (आईपी) सेवाओं के आँकड़ों से पता चला है कि एशिया आधारित प्रवर्तकों ने 50 प्रतिशत से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट दायर किए हैं।

इस बाबत विपो ने एक बयान जारी किया, “एशिया आधारित प्रवर्तकों ने विपो के जरिए 2018 में पहली बार सभी अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट आवेदनों में से आधे से ज्यादा आवेदन दर्ज किए हैं। इनमें चीन, भारत और कोरिया गणराज्य से सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है। इस तरह विपो की वैश्विक बौद्धिक संपदा (आईपी) सेवाओं के लिए एक रिकॉर्ड बनाने वाला साल रहा।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस  की रिपोर्ट की मानें तो ज्यादातर भारतीय पेटेंट टीवीएस मोटर कंपनी, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से दायर किए गए हैं। रेड्डीज, सन फार्मा, सिप्ला और ल्यूपिन सहित भारतीय दवा कंपनियों ने पेटेंट दायर करने वाली सूची में अपनी महत्त्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज की है।