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चंडीखोल व पदुर में 65 लाख मीट्रिक टन के दो और पेट्रोलियम भंडार को दी गई स्वीकृति

पेट्रोलियम रिज़र्व कार्यक्रम के दूसरे चरण में मोदी सरकार ने जुलाई 2021 में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) प्रणाली के तहत चंडीखोल (4 एमएमटी) और पदुर (2.5 एमएमटी) में 65 लाख मीट्रिक टन (एमएमटी) भूमिगत भंडारण की कुल भंडारण क्षमता के दो अतिरिक्त वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक सुविधाओं की स्थापना के लिए स्वीकृति दी है।

इन भंडारण सुविधाओं के निर्माण के प्रस्ताव के अनुरोध को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण के लिए वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में 210 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी। इसे इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) को वितरित कर दिया गया है।

यह जानकारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने सोमवार (26 जुलाई) को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

सामरिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) कार्यक्रम के पहले चरण में भारत सरकार ने अपने विशेष प्रयोजन वाहन, आईएसपीआरएल के माध्यम से 5.33 एमएमटी की कुल क्षमता के साथ पेट्रोलियम भंडारण सुविधाएँ स्थापित की हैं।

ये रणनीतिक भंडार तीन स्थानों विशाखापत्तनम (1.33 एमएमटी), मंगलुरु (1.5 एमएमटी) और पदुर (2.5 एमएमटी) पर स्थापित किए गए थे। सभी भंडारण सुविधाओं को कच्चे तेल से भर दिया गया है।

पहले चरण के तहत स्थापित पेट्रोलियम भंडार रणनीतिक हैं। इन भंडारों में संग्रहीत कच्चे तेल का उपयोग तेल की कमी की घटना के दौरान किया जाएगा। ऐसा तब होगा, जब भारत सरकार की ओर इसकी घोषणा की जाएगी।