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टी-90 टैंकों की पहली बार चीन के विरुद्ध दौलत बेग ओल्डी की आखिरी चौकी पर तैनाती

दौलत बेग ओल्डी में स्थित आखिरी चौकी पर पहली बार भारत ने टी-90 मिसाइल फायरिंग टैंकों, बख्तरबंद कर्मियों के वाहक और 4,000 सैनिकों की टोली को तैनात किया है। वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के अनुसार यह कदम शक्सगम-काराकोरम पास से चीनी आक्रमकता को रोकने के लिए उठाया गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार यह आखिरी चौकी 16,000 फीट की ऊँचाई पर काराकोरम पास के दक्षिण में, चिप-चाप नदी के तट पर और गलवान-श्योक के संगम के उत्तर में स्थित है।

टी-90 टैंक 46 टन वजनी होते हैं और दारबुक श्योक दौलत बेग ओली सड़क के कई पुल इसका भार उठाने में अक्षम हैं इसलिए विशेष उपकरणों के माध्यम से इन टैंकों को नदियों से पार करवाया गया। इससे पहले भी गलवान घाटी के अग्रिम मोर्चे पर छह टी-90 टैंकों को तैनात किया गया था।

चीन शक्सगम घाटी में 36 किलोमीटर सड़क पहले से बना चुका है और यदि वह इस काराकोरम पास से जोड़ने में सफल हो गया तो पीएलए उत्तर से दौलत बेग ओल्डी पर दबाव बना सकती है, उत्तर से चीनी घुसपैठ को रोकने के लिए ही यह तैनाती की गई है।

एक ओर जहाँ दौलत बेग ओल्डी में तैनातियाँ बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य कमांडरों की वार्ता के बाद पूर्वी लदाख में स्थित पैट्रोलिंग पॉइंट 15, 14 और 17ए से दोनों सेनाएँ पीछे हटी हैं।