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“जनता को प्रदर्शन का अधिकार पर रास्तों को अवरुद्ध करने का नहीं”- सर्वोच्च न्यायालय

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध को लेकर दिल्ली के शाहीन बाग के प्रदर्शन को हटाने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “जनता को विरोध करने का अधिकार है लेकिन वो रास्तों को अवरुद्ध नहीं कर सकते हैं।”

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा, “एक कानून के खिलाफ जनता की शिकायत है। मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्हें प्रदर्शन का अधिकार है लेकिन वे सड़कों को अवरुद्ध नहीं कर सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसे क्षेत्र में अनिश्चितकाल तक प्रदर्शन नहीं हो सकते हैं। अगर आप प्रदर्शन करना चाहते हैं तो वो एक निर्धारित स्थान पर होना चाहिए। शाहीन बाग में लंबे समय से प्रदर्शन चल रहा है लेकिन यह दूसरे लोगों को असुविधा में नहीं डाल सकता है।” पीठ ने कहा, “वह दूसरे पक्ष को सुने बगैर कोई निर्देश जारी नहीं करेगी।” न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 फरवरी तय कर दी है।

बता दें कि शाहीन बाग में दिसंबर से विरोध प्रदर्शन चल रहा है। लोग सीएए को वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। शाहीन बाग को लेकर पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि किसी सार्वजनिक जगह पर अनिश्चितकाल तक प्रदर्शन नहीं हो सकता है।