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सर्वोच्च न्यायालय ने हटाया मराठा आरक्षण, “50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण असंवैधानिक”

सर्वोच्च न्यायालय की एक संवैधानिक पीठ ने 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण को असंवैधानिक मानते हुए मराठा आरक्षण को अस्वीकार कर दिया है। सर्वसम्मति से पीठ ने माना कि कोई विशेष परिस्थितियाँ मराठा आरक्षण को सही नहीं ठहरातीं जिससे 50 प्रतिशत की सीमा को अनदेखा किया जाए।

“न गायकवाड़ आयोग और न उच्च न्यायालय ने ऐसी परिस्थिति पर प्रकाश डाला है जिससे मराठाओं को आरक्षण देने के लिए 50 प्रतिशत की सीमा को पार किया जाए। इस प्रकार हम पाते हैं कि कोई असाधारण परिस्थितियाँ नहीं हैं जिससे आरक्षण की सीमा को बढ़ाया जाए।”, न्यायालय ने कहा।

पीठ ने महाराष्ट्र सामाजिक और आर्थिक पिछड़ा वर्ग अधिनियम को वापस ले लिया जिससे अब मराठाओं को नौकरी व शिक्षा में 16 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलेगा। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस अधिनियम के लागू होने के बाद से महाराष्ट्र में 68 प्रतिशत आरक्षण हो गया था, लाइव लॉ ने रिपोर्ट किया।