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सर्वोच्च न्यायालय अयोध्या पर फैसले के बाद सबरीमाला, राफेल समीक्षा पर निर्णय सुनाएगा

सर्वोच्च न्यायालय गुरुवार (14 नवंबर) को सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश और राफेल लड़ाकू विमान मामले में दायर याचिकओं की समीक्षा के विषय में अपना निर्णय सुनाएगा।

राफेल मामले में दिसंबर 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई जाँच की मांग खारिज कर दी थी। इसी मामले पर दायर समीक्षा याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय अपना निर्णय सुनाएगा।

फरवरी माह में सबरीमाला मामले में मुख्य न्यााधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पाँच जजों की बेंच ने साल 2018 में सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की मंजूरी दे दी थी।

बाद में सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले से जुड़ी पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। पाँच जजों की बेंच ने केरल सरकार, त्रावणकोर देवास्वोम मंडल (टीडीबी), नायर सेवा समाज आदि सभी पक्षों की दलीलें सुनी है।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि इस फैसले से हम यह तय करेंगे कि हमें हमारे पुराने निर्णय की समीक्षा करनी चाहिए या नहीं।

आपको बता दें कि के इस महीने रंजन गोगोई का कार्यकाल खत्म हो रहा है उससे पहले सबरीमाला मामले में आने वाला निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुनवाई के आखिरी दिन टीडीबी सबरीमाला मंदिर की देखरेख करता है, उसने सर्वोच्च न्यायालय के साल 2018 के निर्णय को सही ठहराते हुए उसका समर्थन किया। टीडीबी ने यह भी कहा कि लैंगिक आधार पर भेदभाव करना सही नहीं है।

राफेल मामले में केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि यह मुद्दा देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। महान्यायवादी केके वेणुगोपाल ने कहा, “हमने अंतर-सरकारी समझौता किया हुआ है जो सबपर लागू होता है और राफेल कोई विशेष नहीं है। यह हमारी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया में और किसी जगह ऐसे मसले कोर्ट नहीं जाते।”

महान्यायवादी न्यायालय को राफेल समझौते के अनुच्छेद 10 की भी जानकारी दी। 14 दिसंबर 2018 को याचिकाकर्ताओं ने पत्युत्तर दायर की ताकि न्यायालय अपने फैसले की समीक्षा करे।