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मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश की माँग को लेकर दायर की गई जनहित याचिका खारिज

मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली एक हिंदू महासभा नेता द्वारा दायर जनहित याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा, “हम इस विषय को तभी सुनेंगे, जब एक मुस्लिम महिला हमारे पास आएगी। हम एक अप्रत्याशित पार्टी की जनहित याचिका की सुनवाई नहीं कर सकते हैं।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, केरल उच्च न्यायालय की ओर से दिए गए निर्णय के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने टिप्पणी की, “एक मुस्लिम महिला इस मामले को चुनौती दे।”

याचिकाकर्ता स्वामी देतात्रेय साई स्वरूप नाथ अखिल भारत हिंदू महासभा की केरल इकाई के अध्यक्ष हैं। उन्होंने सबरीमाला फैसले के बाद जनहित याचिका दायर की थी, जिसके कारण भारी विरोध प्रदर्शन भी हुए।

केरल उच्च न्यायालय ने महासभा की याचिका को खारिज कर उसे सिर्फ प्रचार का माध्यम बताया। पीठ ने दावा किया कि याचिका में महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश से वंचित करने के पर्याप्त सबूतों की कमी थी।

केरल उच्च न्यायालय ने कहा, “याचिका में दिए गए कथन यह ज़ाहिर नहीं करते हैं कि याचिकाकर्ता वह व्यक्ति है, जिसे इस्लामी धर्म के अनुष्ठानों और प्रथाओं से संबंधित होना चाहिए। वह कथित रूप से मस्जिद में मुस्लिम महिला के प्रवेश न करने की बात कह रहा है। उसने संतोषजनक ढंग से अपने कथनों को नहीं रखा है।