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सर्वोच्च न्यायालय ने “शरारती” कहकर खारिज की “हलाल” पर प्रतिबंध वाली याचिका

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार (12 अक्टूबर) को मांस के लिए जानवरों के हलाल करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने याचिका को शरारती करार दिया है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय को दलील दी थी कि यूरोपीय न्यायालय ने अतीत में फैसला सुनाया था कि हलाल बेहद दर्दनाक होता है। इसमें जानवर को बहुत दर्द और पीड़ा होती है।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, “हलाल की तकनीक एक विशेष समुदाय (मुस्लिम) से संबंधित एक कुशल व्यक्ति द्वारा की जाती है। इसमें खून की आखिरी बूँद तक पशु को जीवित रहने की आवश्यकता होती है। यह झटका की तुलना में बहुत अधिक दर्दनाक होता है।”

न्यायमूर्ति एसके कौल की अगुआई वाली पीठ ने कहा, “हलाल केवल ऐसा करने का एक तरीका है। इसके विभिन्न तरीके होते हैं जैसे हलाल, झटका। कुछ लोग झटका करते हैं, कुछ लोग हलाल करते हैं। यह कैसे एक समस्या हो सकती है? कुछ लोग हलाल मांस खाना चाहते हैं। कुछ झटका मांस खाना चाहते हैं। कुछ सरीसृप मांस खाना चाहते हैं। कल आप कहेंगे कि कोई भी मांस नहीं खाना चाहिए? हम यह निर्धारित नहीं कर सकते कि किसे शाकाहारी होना चाहिए और किसे मांसाहारी होना चाहिए।”

पीठ ने बाद में इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए याचिका खारिज कर दी।