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अयोध्या भूमि विवाद- 6 अगस्त से सर्वोच्च न्यायालय में प्रतिदिन होगी सुनवाई

अयोध्या भूमि विवाद को लेकर 6 अगस्त से सर्वोच्च न्यायालय में प्रतिदिन सुनवाई होगी। विवाद सुलझाने के लिए गठित मध्यस्थता समिति की रिपोर्ट के किसी नतीजे पर न पहुँचने के बाद यह आदेश दिया गया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “अब इस मामले की सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता है।” पीठ में न्यायाधीश एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एसए नजीर शामिल हैं। अदालत ने मध्यस्थता समिति भंग कर दी है। अब सुनवाई सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 8 मार्च को अयोध्या मसले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता समिति बनाई थी। पीठ ने सदस्यों को निर्देशित किया था कि 8 सप्ताह में मामले का हल निकालें। पूरी बातचीत कैमरे के सामने करने के भी निर्देश दिए।

2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में 14 याचिकाएँ दाखिल की गई थीं। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था “अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में बराबर से बाँट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला को।

उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अयोध्या विवाद मामले की दैनिक आधार पर सुनवाई करने संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्णय का शुक्रवार को स्वागत किया। उसने उम्मीद जताई कि राम मंदिर के निर्माण में आने वाली कानूनी अड़चनें जल्द ही दूर हो जाएँगी ।