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सर्वोच्च न्यायालय ने सुदर्शन टीवी के ‘यूपीएससी जिहाद’ शो को उकसाने वाला माना

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार (15 सितंबर) को सुदर्शन टीवी को फटकार लगाते हुए कहा, “भारत विविध संस्कृतियों को अपने में समाहित करने वाला देश है। मीडिया में स्व नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए और पत्रकारों को अपनी बहस निष्पक्ष करनी चाहिए।”

यह सख्त टिप्पणी सुदर्शन टीवी के शो ‘यूपीएससी जिहाद’ को लेकर एक याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई। शो में दिखाया जाना है कि मुसलमानों ने भारतीय सिविल सेवा में घुसपैठ कैसे की है।

न्यायाधीश डीवीई चंद्रचूड़, न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा और न्यायाधीश केएम जोसेफ की पीठ ने कहा, “पत्रकारों की स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है। एक पत्रकार को किसी भी अन्य नागरिक की तरह स्वतंत्रता है और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) में कोई अलग स्वतंत्रता नहीं है।”

टीवी चैनल की निंदा करते हुए पीठ ने वकील से कहा, “आपका मुवक्किल यह स्वीकार नहीं कर रहा है कि भारत विविध संस्कृतियों के मिश्रण वाला देश है। आपके मुवक्किल को अपनी आज़ादी के अधिकार का उपयोग सावधानी से करना चाहिए।” सुदर्शन टीवी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने पीठ से कहा कि चैनल इसे राष्ट्रहित में एक खोजी खबर मानता है।

पीठ ने कहा, “हमें उन पत्रकारों की आवश्यकता है, जो अपनी बहस में निष्पक्ष हैं। इस कार्यक्रम को देखिये, कैसा उन्माद पैदा करने वाला यह कार्यक्रम है कि एक समुदाय प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश कर रहा है। इस कार्यक्रम का विषय कितना उकसाने वाला है कि मुस्लिमों ने सेवाओं में घुसपैठ कर ली है। तथ्यों के बगैर ही यह संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को संदेह के दायरे में ले आता है।”

मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी। इससे पूर्व, सर्वोच्च न्यायालय ने शो के पूर्व प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि कार्यक्रम की सामग्री सांप्रदायिक तनाव को रोकेगी।