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“जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएँ 2019 की अपेक्षा 2020 में 87.6% कम”- डीजीपी

जम्मू-कश्मीर में 2019 की तुलना में 2020 में पत्थरबाजी की घटनाओं में 87.13 प्रतिशत की गिरावट आई। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा, “2020 में पत्थरबाजी की 255 घटनाएँ हुईं, जो 2019 की 1999 पथराव की घटनाओं की अपेक्षा बेहद कम हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, डीजीपी ने कहा, “कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर तरीके से नियंत्रण में है। 2021 के लिए हमारा संकल्प जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति को अधिक मजबूत करना है।”

2019 में हुई 1999 पथराव की घटनाओं में से 1193 घटनाएँ जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन राज्य की विशेष स्थिति के खत्म होने के बाद हुईं।

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार, 2016 की तुलना में 2020 में पत्थरबाजी की घटनाओं में 90 प्रतिशत गिरावट आई। 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की हत्या के बाद पूरे कश्मीर में हिंसक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे।

कश्मीर में पथराव विरोध प्रदर्शन के दौरान हथियार का एक विकल्प है। भारतीय सेना के एक शीर्ष कमांडर ने पथराव की प्रवृत्ति को आंदोलनकारी आतंकवाद करार दिया था। दरअसल, ये मुख्य रूप से सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हैं, जो पत्थरबाजों पर बंदूक से जवाब नहीं दे सकते।