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श्रीलंका ने राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु बुर्का समेत किसी भी तरह से चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगाया

इस्लामी चरमपंथियों को रोकने के उद्देश्य से श्रीलंका की कैबिनेट ने मंगलावर (27 अप्रैल) को राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए सार्वजनिक स्थानों पर सभी तरह से चेहरे को ढकने पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी है।

कैबिनेट प्रवक्ता केहलिया रामबुकवेला ने साप्ताहिक मीडिया सम्मेलन में कहा, “कैबिनेट ने प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी है। अब यह कानूनी प्रारूपकार के पास जाएगा और फिर संसद में लाया जाएगा।”

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कोलंबो में पाकिस्तानी दूत ने एक ट्वीट में कहा, “यह प्रतिबंध सामान्य श्रीलंकाई मुसलमानों और दुनियाभर के मुसलमानों की भावनाओं को चोट पहुँचाने का काम करेगा।”

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में ईस्टर संडे के आतंकी हमले के बाद श्रीलंका ने बुर्के पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगाने के लिए आपातकालीन नियमों का उपयोग किया था।

हाल ही में 24 अप्रैल को श्रीलंकाई पुलिस ने एक शीर्ष मुस्लिम नेता और संसद सदस्य को गिरफ्तार किया था। सांसद का नाम रिशाद बाथीयुद्दीन है, जो ऑल सीलोन मक्कल पार्टी का नेता है। पुलिस ने उन्हें और उनके भाई रियाज़ को आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पीटीए) के तहत हिरासत में लिया था।

श्रीलंका ने चरमपंथी गतिविधियों के लिए इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) और अल-कायदा सहित 11 कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। 21 अप्रैल 2019 को ईस्टर बम विस्फोटों में 279 लोग मारे गए थे और करीब 500 घायल हुए थे।