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‘लिंचिंग शब्द का उपयोग कर कुछ लोग समाज में वैमनस्य फैला रहे हैं’- मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि लिंचिंग जैसी घटनाओं का उपयोग वास्तव में भारत, हिंदू समाज को बदनाम करने और कुछ समुदायों में भय पैदा करने के लिए किया जा रहा है।

मंगलवार (8 अक्टूबर) को महाराष्ट्र के नागपुर में संघ के 94वें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए भागवत ने कहा, “ऐसी घटनाओं में आरएसएस के सदस्य शामिल नहीं होते हैं और इसके बजाय वे इसे रोकने की कोशिश करते हैं।”

उन्होंने कहा कि समाज में जिस तरह का सामंजस्य होना चाहिए था, वह इतने साल बाद भी नहीं है।

भागवत ने अपने संबोधन में कहा, “आरएसएस ऐसी हिंसक घटनाओं को विफल करने की कोशिश करता रहा है। इस तरह की घटनाओं की देश में कोई परंपरा नहीं है, लेकिन उन्हें चित्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं और लिंचिंग जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके कुछ लोग देश और हिंदू समाज को बदनाम करना चाहते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि समाज के कुछ तत्व देश को विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं। वे घटनाओं में संघ का नाम घसीटकर दोनों समुदायों के बीच खाई पैदा करना चाहते हैं। वर्गों के बीच अविश्वास, भय और शत्रुता पैदा करने के लिए निहित स्वार्थों द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं जो अभी तक संघ के संपर्क में नहीं आए हैं।

आरएसएस प्रमुख ने जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए केंद्र सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 का उन्मूलन कर सरकार ने साबित कर दिया है कि यह लोगों की भावनाओं को पूरा करने और समाज के हित का सम्मान करने का साहस रखती है।