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555 सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा पंजा साहिब में बैसाखी मनाने जाएँगे

सिख श्रद्धालु बड़ी संख्या में 11 अप्रैल को गुरुद्वारा पांजा साहिब में बैसाखी मनाने के लिए दिल्ली से पाकिस्तान की यात्रा करने की तैयारी कर रहे हैं।

गुरुद्वारा पांजा साहिब पाकिस्तान के हसन अब्दाल में स्थित एक प्रसिद्ध सिख मंदिर है। यह मंदिर विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी के हाथों के निशान गुरुद्वारे के एक  शिलाखंड पर अंकित हैं।

दिल्ली से 555 तीर्थयात्री अटारी सीमा के माध्यम से पाकिस्तान में प्रवेश करेंगे और पाकिस्तान के हसन अब्दाल पहुँचेंगे। अपनी 10 दिवसीय पाकिस्तान यात्रा के दौरान, भक्त 21 अप्रैल को वापस लौटने से पहले अन्य सिख पवित्र स्थानों का दौरा करेंगे।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने रविवार (19 जनवरी) को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में रहने वाले सिखों और सहजधारी सिखों के पास वैध पहचान प्रमाण और कम से कम एक वर्ष की वैधता वाले भारतीय पासपोर्ट हैं वें ही सिखों के पाकिस्तान में पवित्र मंदिर की तीर्थ यात्रा के लिए आवेदन करने के योग्य हैं।

यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, श्रद्धालु 12 अप्रैल को अटारी बॉर्डर पार करेंगे और उसी दिन एक विशेष ट्रेन से गुरुद्वारा पंज साहिब पहुँचेंगे। 13 और 14 अप्रैल को गुरुद्वारा पंज साहिब में बैसाखी मनाने के बाद, वें 15 अप्रैल को नानकाना साहिब के लिए रवाना होंगे।

सिरसा ने इच्छुक सिख श्रद्धालुओं को 15 फरवरी तक गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब परिसर में एडीएसजीएमसी के साथ अपने पासपोर्ट जमा करने के लिए कहा।

डीएसजीएमसी 25 फरवरी तक विदेश मंत्रालय के पास ज़रूरी दस्तावेज जमा करेगा और इसे पाकिस्तान उच्चायोग को भेज दिया जाएगा। तीर्थयात्रियों को भारतीय और पाकिस्तान एजेंसियों द्वारा जाँच के बाद वीजा जारी किया जाएगा।

सिरसा ने कहा कि पाकिस्तान में गुरुद्वारा पांजा साहिब द्वारा भारत से अनुमति प्राप्त 3,000 तीर्थयात्रियों को, 555 तीर्थयात्रियों का कोटा आवंटित किया गया है, जो केवल 1800 तीर्थयात्रियों के आवंटित कोटा के साथ पंजाब के लिए दूसरा है।

इसके अलावा, 200 तीर्थयात्री हरियाणा से यात्रा करेंगे, जबकि पश्चिम बंगाल को पाँच तीर्थयात्रियों का सबसे कम कोटा आवंटित किया गया है।

(इस समाचार को आईएएनएस की सहायता से प्रकाशित किया गया है।)