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शोभा डे ने नकारा पाकिस्तानी उच्च आयुक्त से प्रेरित ‘कश्मीर जनमत संग्रह’ लेख का दावा

भारत के लिए पाकिस्तानी उच्च आयुक्त अब्दुल बासित के कथन को लेखिका शोभा डे ने नकार दिया है। बासित ने कहा था कि उनके निवेदन पर डे ने 2016 में कश्मीर में जनमत संग्रह का समर्थन करते हुए लेख लिखा था, एएनआई  ने रिपोर्ट किया।

बासित का दावा है कि बुरहान वानी के मारे जाने के बाद वे डे के पास गए और कहा कि उन्हें कश्मीर में जनमत संग्रह के समर्थन में एक लेख लिखना चाहिए। डे का यह लेख “बुरहान वानी मर चुका है लेकिन वह तब तक जीवित रहेगा जब तक हम यह नहीं जान लेते कि कश्मीर सच में क्या चाहता है” शीर्षक से छपा था।

वीडियो क्लिप में डे ने बासित को “नीच व्यक्ति” कहा जो “कहानी बना रहा है” और कहा कि वे उनसे सिर्फ एक ही बार मिली हैं, इस वर्ष जनवरी में जयपुर लिट फेस्ट में। डे के अनुसार बासित एक प्रकाशन पार्टी में ज़बरदस्ती उनके समूह में घुस गए थे।

डे ने आगे बताया कि बासित ने संवाद में घुसने का प्रयास किया लेकिन उनका अनदार कर लगभग “उन्हें वहाँ से जाने के लिए कह दिया गया था”। डे ने यह भी कहा कि बासित ने कई मुद्दों पर बात करना चाही लेकिन चीन का मुद्दा आते ही, वे चले गए।

पाकिस्तानी ब्लॉगर फरहान वर्क के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने शोभा डे को कश्मीर के स्व-निर्णय पर लेख लिखने के लिए प्रेरित किया था। इसके जवाब में डे ने कहा कि वे “गर्वित और देशप्रेमी भारतीय” हैं और बासित ने ऐसा कहकर उनके “40 वर्ष की सकारात्मक और अच्छी पत्रकारिता” का अपमान किया है।