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पुरी के शंकराचार्य का आरोप, “सुनियोजित योजना बनाकर जगन्नाथ रथ यात्रा रुकवाई गई”

पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने रविवार को आरोप लगाया कि कोरोनावायरस महामारी के दौरान भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा रुकवाने के लिए सुनियोजित योजना बनाई गई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, शंकराचार्य का यह बयान तब आया, जब गजपति महाराज दिब्यसिंह देब और सेवादारों ने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से अनुरोध किया कि वे सर्वोच्च न्यायालय के 18 जून के आदेश में संशोधन के लिए हस्तक्षेप करें। इस वर्ष रथ यात्रा रद्द होने पर शंकराचार्य ने कहा, “न्यायालय 20 जून को समीक्षा याचिका स्वीकार कर सकती थी। इसमें उसके 18 जून के स्थगनादेश में संशोधन करने का अनुरोध हुआ था। ऐसे कई उदाहरण हैं, जब न्यायालय ने अवकाश में भी महत्वूपर्ण मामलों पर सुनवाई की है।” इससे पूर्व पुरी में रथ यात्रा की अनुमित देने की बात कहते हुए राज्यसभा सदस्य रघुनाथ महापात्रा ने आरोप लगाया था कि सर्वोच्च न्यायालय को यह गलत तथ्य दिए गए कि यात्रा में 10 से 12 लाख लोग जुटेंगे। गजपति महाराज ने नवीन पटनायक को लिखे पत्र में कहा, “वार्षिक रथ यात्रा का आयोजन स्वीकृत और अनिवार्य है। हम चाहते हैं कि राज्य सरकार न्यायालय से रथ यात्रा की अनुमति ले। फिर भले ही उसमें श्रद्धालु शामिल न हों। पुराणों में लिखा है कि वह परमात्मा हैं। रथ यात्रा परंपरा नहीं बल्कि सदियों से चला आ रहा धार्मिक अनुष्ठान है। इसे किसी भी हाल में नहीं रोका जा सकता है।”