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पोप फ्रांसिस पर कैथोलिक चर्च यौन पीड़ितों ने न्यूयॉर्क संघीय न्यायालय में मुकदमा किया

कैथोलिक पादरियों द्वारा यौन शोषण का शिकार हुए लोग पोप फ्रांसिस पर मुकदमा कर रहे हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार पीड़ितों ने दावा किया है कि वेटिकन के वरिष्ठ अधिकारी जानते थे कि कई पादरी बच्चों का यौन शोषण करते हैं लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसे गुप्त रखा।

मंगलवार (17 दिसंबर) को मैनहट्टन की संघीय अदालत में यौन शोषण के पीड़ितोंं द्वारा वर्ग कार्रवाई मुकदमा दायर किया गया।

“होली सी सदियों से जानते हैं कि कैथोलिक पादरी कैथोलिक परगनों और स्कूलों में अपने पदों और भूमिकाओं का उपयोग यौन उत्पीड़न के लिए करते आए हैं।”, मुकदमे के आरोप में कहा गया।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ग कार्रवाई के मुकदमे में आरोप लगाया कि ‘होली सी’ ने यौन शोषण के मामलों को जाहिर ना होने देने के लिए दुनिया भर में अपने बिशप को निर्देश देकर लापरवाही से काम किया।

इससे पूर्व सात बचे हुए लोगों ने चंद डॉलरों के लिए कैथोलिक प्रांत के साथ समझौता कर लिया था।

वकील जेफ हरमन ने कहा, “जो अब हम जानते हैं वह यह है कि पोप फ्रांसिस के माध्यम से होली सी ने बिशप के लिए बहुत विशिष्ट नियमों और नीतियों को जारी किया था और इनमें बच्चों के साथ पादरियों द्वारा किए जा रहे यौन शोषण के बारे में जानकारी गुप्त रखने के निर्देश दिए गए थे।”

“इसी नीति के कारण बच्चों के परिवारों को पता नहीं चल पाया कि बच्चे बालकामुकों, बालकामुक पादरियों का सामना कर रहे हैं और शोषित हो रहे हैं। उन्होंने इसे विशेष रूप से गुप्त रखा।”, हरमन ने कहा।

बाल पीड़ित अधिनियम द्वारा ही यह वर्ग कार्रवाई संभव हो सकी। यह अधिनियम 12 महीनों के लिए कानून की सीमाओं की व्यवस्था को समाप्त करता है और पीड़ितों को अपने पुराने दावों को पुनर्जीवित करने की अनुमति देता है।