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न्यायालय ने यूजीसी का फैसला बरकरार रखा, कहा- “30 सितंबर तक करवाएँ परीक्षाएँ”

सर्वोच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के फैसले को बरकरार रखते हुए शुक्रवार (28 अगस्त) को कहा, “अंतिम वर्ष की परीक्षाएँ 30 सितंबर तक करवाई जाएँ। राज्य अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के बिना छात्रों को प्रमोट नहीं कर सकते हैं।”

न्यूज़-18 की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, “राज्यों को छात्रों को प्रमोट करने के लिए परीक्षा करवानी चाहिए। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्यों में महामारी को देखते हुए परीक्षाएँ स्थगित की जा सकती हैं और तिथि तय करने के लिए यूजीसी से सलाह ली जा सकती है।”

न्यायालय में दायर की गई याचिकाओं में कहा गया था कि छात्रों ने पाँच सेमेस्टर पूरे किए हैं। उनके कम्यूलेटिव ग्रेड (सीजीपीए) के आधार पर अंतिम वर्ष के परिणाम घोषित किए जा सकते हैं। यूजीसी ने सितंबर के अंत तक परीक्षाएँ करने का आदेश दिया था। उसका तर्क था कि छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की रक्षा करने के लिए परीक्षाएँ कराई जा रही हैं। परीक्षाओं के बिना डिग्री नहीं दी जा सकती है।

बता दें कि आदित्य ठाकरे की युवा सेना समेत कई याचिकाओं में कोविड-19 संकट के बीच परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की गई थी। इनमें कहा गया था कि सभी शैक्षणिक संस्थान वायरस के संकट के कारण बंद हैं। इसके बढ़ रहे प्रकोप के मद्देनज़र परीक्षाएँ रद्द की जानी चाहिए।