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सर्वोच्च न्यायालय ने ममता के धरने को गलत बताया, कहा- “सीबीआई कार्रवाई हेतु स्वतंत्र”

सर्वोच्च न्यायालय ने नारदा घोटाले के मामले में ममता बनर्जी द्वारा दिए गए धरने को बुधवार (26 मई) को गलत बताया है। साथ ही सीबीआई से कहा है कि वह उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, “तृणमूल नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर धरना देकर विरोध करना गलत है। उनके कृत्यों की सज़ा अभियुक्तों को नहीं दी जा सकती है। नेताओं के धरने आदि को सराहा नहीं जा सकता है। न्यायालय मुख्यमंत्री और कानून मंत्री के कृत्यों का समर्थन नहीं करता है।”

न्यायमूर्ति विनीत शरण और न्यायमूर्ति बीआर गवई की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, “हम यह साफ करना चाहते हैं कि धरनों को उचित नहीं मानते हैं। सीबीआई चाहे तो कानून को अपने हाथों में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।”

पीठ ने कहा, “सीबीआई को कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए साफ किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।” बता दें कि उच्च न्यायालय ने टीएमसी के तीन नेताओं समेत चार नेताओं को घर में नज़रबंद करने की स्वीकृति दी थी।

इससे पूर्व, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय ने अनुरोध किया कि इस मामले को आपराधिक वाद में ज़मानत को रद्द करने की सीबीआई की याचिका के तौर पर नहीं देखा जाए। यह मामला इस तथ्य पर है कि राज्य की मुख्यमंत्री जाँच एजेंसी को काम करने से रोकने के लिए धरने पर बैठ गईं। यहाँ हमेशा ऐसा होता है कि मुख्यमंत्री आरोपियों की मदद के लिए थानों में चली जाती हैं।