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अर्णब पर एफआईआर को रद्द और जाँच सीबीआई को सौंपने पर सर्वोच्च न्यायालय की ना

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को पत्रकार अर्णब गोस्वामी की याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मामले की जाँच को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को हस्तांतरित करने की माँग की थी। अर्णब के विरुद्ध कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी पर की गई टिप्पणी को लेकर मामला चल रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय ने उनपर दर्ज एफआईआर को रद्द करने से भी इनकार कर दिया है। न्यायालय ने रिपब्लिक टीवी के मुख्य संपादक को प्राप्त अंतरिम संरक्षण को तीन सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है। न्यायालय ने कहा, “पत्रकारिता की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी का मूल आधार है।”

इससे पूर्व, अर्णब गोस्वामी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने न्यायालय से सीबीआई जैसी एजेंसी को जाँच स्थानांतरित करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था, “गोस्वामी के खिलाफ 14 अप्रैल को बांद्रा स्टेशन के बाहर प्रवासी मजदूरों को जुटने के मामले को सांप्रदायिक रंग देने को लेकर दर्ज प्राथमिकी एक रणनीति का हिस्सा है। यह एक राजनीतिक पार्टी है, जो एक पत्रकार को निशाना बना रही है। शिकायतकर्ता एक राजनीतिक दल के सदस्य हैं। उन्हें सरकार से समस्या है। वे इस पत्रकार को सबक सिखाना चाहते हैं।”

इस पर आपत्ति जताते हुए महाराष्ट्र सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, “सीबीआई जाँच आपके हाथों में जाएगी। यह बात झूठी है कि अर्णब गोस्वामी को परेशान किया जा रहा है। उनसे केवल प्रासंगिक सवाल ही पूछे गए हैं। “