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सर्वोच्च न्यायालय ने घाटी में इंटरनेट बहाल करने के लिए केंद्र को जारी किया नोटिस

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को लेकर विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई के दौरान घाटी में इंटरनेट सेवा बहाल करने के लिए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। दूसरी याचिका में राज्य में बच्चों को अवैध तरीके से नज़रबंद करने पर सुनवाई करते हुए मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजा।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया था कि वह केंद्र को निर्देश जारी करे, ताकि घाटी में तेज संचालित होने वाली इंटरनेट सेवा और अस्पतालों में लैंडलाइन सेवा तत्काल प्रभाव से शुरू की जा सकें।

अदालत ने बाल अधिकार विशेषज्ञ एनाक्शी गांगुली और प्रोफेसर शांता सिन्हा की याचिका को संवैधानिक पीठ के पास भेज दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जम्मू-कश्मीर के बच्चों को अवैध तरीके से नज़रबंद करके रखा गया है।

न्यायालय ने राज्यसभा सदस्य वाइको की उस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया, जिसमें राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला को उसके समक्ष पेश करने की मांग की गई। अदालत ने कहा, “एमडीएमके नेता जन सुरक्षा कानून के तहत हिरासत के आदेश को चुनौती दे सकते हैं।फारुक अब्दुल्ला  जन सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में हैं।”

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को अपनी संविधान पीठ के पास भेज दिया है। न्यायमूर्ति एनवी रमण की अगुआई वाली संविधान पीठ मंगलवार को मामले की सुनवाई करेगी।