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“सबरीमाला मंदिर के प्रशासन पर विशेष कानून बनाए केरल सरकार”- सर्वोच्च न्यायालय
आईएएनएस - 21st November 2019

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को केरल सरकार को सबरीमाला मंदिर के प्रशासन के संबंध में एक विशेष कानून बनाने को कहा। न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार से कहा, “वह जनवरी के तीसरे सप्ताह से पहले एक कानून पेश कर सकती है, जिसमें तीर्थयात्रियों के कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाए।”

न्यायालय ने सबरीमाला और अन्य मंदिरों के प्रशासन के लिए संयुक्त कानून बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार को दी। राज्य सरकार के वकील ने अदालत में कहा, “एक मसौदा तैयार हुआ है, जो कानून में संशोधन को दर्शाता है। वर्तमान में मंदिर प्रशासन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड द्वारा शासित है।”

सरकारी वकील के अनुसार, इस मसौदे में मंदिर सलाहकार समिति पर एक तिहाई महिला प्रतिनिधि होने और देवस्वोम बोर्ड से सबरीमाला मंदिर को हटाने और फिर एक अलग कानून बनाने का प्रस्ताव है। सुनवाई के दौरान सबरीमाला मंदिर पर 2018 के फैसले के संबंध में एक बहस शुरू हुई। सितंबर 2018 के फैसले की पृष्ठभूमि में मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाली पीठ में से एक न्यायाधीश ने फैसला सुनाया था, जिसने सभी उम्र की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी।

राज्य सरकार ने जवाब दिया कि वह मंदिर सलाहकार समिति में 50 साल से ऊपर की महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का प्रस्ताव रखती है। महिला प्रविष्टि का मुद्दा बड़ी पीठ द्वारा तय किया जाएगा। 2011 में सबरीमाला मंदिर के प्रशासन का मुद्दा उठाते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई थी।

इस साल अगस्त में राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि सबरीमाला मंदिर के प्रशासन के संबंध में एक अलग कानून विचाराधीन है। हाल ही में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 3: 2 बहुमत के फैसले में 5 न्यायाधीशों वाली पीठ ने सबरीमाला 2018 के फैसले की समीक्षा 7 न्यायाधीशों वाली पीठ को भेजी थी।