समाचार
उच्चतम न्यायालय- रेहाना फातिमा, बिंदु अम्मिनी को सबरीमाला में प्रवेश की अनुमति नहीं

शुक्रवार (13 दिसंबर) को उच्चतम न्यायालय ने दो महिलाओं, रेहाना फातिमा और बिंदु अम्मिनी द्वारा सबरीमाला मंदिर में प्रवेश अनुमति के लिए दायर याचिका पर निर्णय लेने से इनकार कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ में सूर्या कांत और बीआर गवाई शामिल हैं। बेंच ने कहा, “हम जल्द से जल्द सात न्यायाधीशों वाली बेंच गठित करने का प्रयास करेंगे, और इस बेंच के निर्णय के बाद इन मामलों को उठाया जाएगा।”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हर महिला जो मंदिर जाना चाहती है, उसे जाना चाहिए। लेकिन, देश में स्थिति विस्फोटक हो गई है, हम कोई हिंसा नहीं चाहते हैं। एक निर्णय है, लेकिन वह इस मुद्दे पर अंतिम शब्द नहीं है।”

बता दें कि नवंबर 2019 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इस मामले की जाँच को बड़ी बेंच को भेजा था और अन्य धर्मों के धार्मिक स्थानों में महिलाओं के प्रवेश पर मुद्दों को भी इसमें शामिल किया था।

उच्चतम न्यायालय में बिंदू का पक्ष रखने वाली वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंग ने अदालत के समक्ष दलील दी, “हम सभी हिंसा से बचने के लिए यहाँ हैं, यह देश अहिंसा की नींव पर आधारित है, हम हिंसा को प्रोत्साहित नहीं करते हैं।”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा यह ऐसी स्थिति नहीं है जहाँ किसी के निजी अधिकार शामिल हो या किसी से जीने का अधिकार छीन लिया गया हो। उन्होंने यह साफ करते हुए कहा कि वे याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय नहीं दे सकते। न्यायाधीश ने कहा, “यह बहुत भावनात्मक मुद्दा है, इस मामले को बड़ी बेंच में जाने दें।”

“हम कोई आदेश पारित नहीं कर रहे हैं, अगर वे (मंदिर अधिकारी) खुशी से मंदिर में आपका स्वागत करते हैं, तो हमें कोई कठिनाई नहीं है।”, मुख्य न्यायाधीश ने कहा।

(इस समाचार को वायर न्यूज़ फीड की सहायता से प्रकाशित किया गया है।)