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मोदी सरकार की नए संसद भवन की परियोजना को सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकृति दी

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार (5 जनवरी) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की सेंट्रल विस्टा परियोजना को स्वीकृति दे दी। इस परियोजना के तहत संसद के नए भवन का निर्माण हो रहा है, जिसको लेकर कई याचिकाएँ दायर की गई थीं।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण कमिटी की रिपोर्ट को भी नियमों के अनुरूप माना है। हालाँकि, लैंड यूज चेंज करने के आरोप की वजह से सेंट्रल विस्टा की वैधता पर प्रश्न चिह्न लगाने वाली याचिका को फिलहाल लंबित रखा गया है।

न्यायाधीश एएम खानविल्कर, दिनेश माहेश्वरी और संजीव खन्ना की तीन जजों की पीठ ने अपना निर्णय सुनाया। उनका कहना था, “हम इस परियोजना को स्वीकृति देते हैं लेकिन पर्यावरण मंत्रालय की सिफारिशों को भी बरकरार रखते हैं। हालाँकि, निर्माण कार्य शुरू करने के लिए धरोहर संरक्षण समिति की अनुमति आवश्यक है।”

तीन न्यायाधीशों की पीठ में निर्णय दो व एक के बहुमत में है। न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कुछ बिंदुओं पर अलग विचार रखे हैं। उन्होंने परियोजना की हिमायत की है पर लैंड यूज में परिवर्तन से वह सहमत नहीं हैं। इसे शुरू करने से पूर्व धरोहर संरक्षण समिति की स्वीकृति आवश्यक है।

बता दें कि परियोजना की घोषणा गत वर्ष सितम्बर में हुई थी। इसमें एक नये त्रिभुजाकार संसद भवन का निर्माण होना है। इसमें 900 से 1200 सांसदों के बैठने की क्षमता होगी। इसके निर्माण का लक्ष्य अगस्त 2022 तक है, जब देश स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ मनाएगा। इसके तहत साझा केंद्रीय सचिवालय के 2024 तक बनने का अनुमान है।