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न्यायाधीकरण में रिक्त पदों को ना भरने पर सर्वोच्च न्यायालय नाराज़, “धैर्य की परीक्षा ना लें”

न्यायाधीकरण में रिक्त पदों को न भरे जाने और न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम पास न किए जाने पर सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार (6 अगस्त) को केंद्र सरकार पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि धैर्य की परीक्षा ना लें।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश एल नागेश्वर राव ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, “आपने कितने लोगों को नियुक्त किया है। ये नियुक्तियाँ कहाँ हैं।”

न्यायालय ने कहा, “मद्रास बार एसोसिएशन में हमने जिन प्रावधानों को समाप्त किया था, न्यायाधिकरण अधिनियम भी वैसा ही है। हमने आपको जो निर्देश दिए थे, उसके मुताबिक, अब तक नियुक्तियाँ क्यों नहीं हुई हैं। केंद्र सरकार ऐसा ना करके न्यायाधिकरण को शक्तिहीन बना रही है।”

आगे कहा गया, “कई न्यायाधीकरण तो बंद होने के निकट हैं। अब तीन विकल्प ही बचते हैं। हम कानून पर रोक लगाएँ, न्यायाधीकरण बंद कर दें व सारे अधिकार न्यायालय को सौंप दे और स्वतः नियुक्तियाँ करें। सोमवार को इस मामले पर सुनवाई की जाएगी और अपेक्षा है कि तब तक नियुक्तियाँ हो जाएँगी।”

न्यायालय ने कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम के विरुद्ध दायर एक याचिका पर नोटिस भी जारी किया। न्यायालय ने कहा, “अगर आपको सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों पर भरोसा नहीं है तो हमारे पास विकल्प नहीं बचता है। विधायिका निर्णय के आधार को छीन सकती है लेकिन ऐसा कानून नहीं बना सकती, जो निर्णय के विरुद्ध हो।”