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सबरीमाला प्रवेश पर सात न्यायाधीशों की पीठ करेगी निर्णय, पिछला आदेश बरकरार

सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति वाले मामले को सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को सात न्यायाधीशों की पीठ के पास भेज दिया है। पीठ ने यह फैसला 3:2 के मतों से दिया है। अदालत ने कहा, “अंतिम निर्णय तक उसका पिछला आदेश बरकरार रहेगा।”

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 28 सितंबर 2018 को 4:1 के बहुमत के साथ मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दी गई थी। इस निर्णय पर 56 पुनर्विचार समेत 65 याचिकाएँ दायर की गई थीं।

पुनर्विचार याचिकाएँ चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली 5 न्यायाधीशों की बेंच में दायर की गई थीं। इसमें मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा और न्यायाधीश एएम खानविलकर ने मामला बड़ी पीठ को भेजने का फैसला दिया। न्यायाधीश फली नरीमन और न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इसके खिलाफ फैसला दिया।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, “याचिका दायर करने वाले का मकसद धर्म और आस्था पर वाद-विवाद शुरू कराना है। महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश पर लगा प्रतिबंध सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं, यह दूसरे धर्मों में भी प्रचलित है। न्यायालय को सबरीमाला जैसे धार्मिक स्थलों के लिए एक सार्वजनिक नीति बनानी चाहिए। अब इस पर बड़ी सात न्यायाधीशों की पीठ निर्णय करेगी। सबरीमाला, मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश और महिला जननांग विकृति से जुड़े धार्मिक मुद्दों पर बड़ी पीठ फैसला करेगी।”