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रूस सीएए पर भारत के साथ, कहा मोदी सरकार का निर्णय एक घरेलू मामला

भारत का लंबे समय से सहयोगी और मित्र रूस भारत द्वारा किए गए नागरिकता कानूनों में संशोधन के समर्थन में आगे आया है और इसे भारत का संप्रभु अधिकार करार दिया है। उसने कहा कि नागरिकता अधिनियम में संशोधन करने का भारतीय संसद का निर्णय भारत का एक घरेलू मुद्दा है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पिछले हफ्ते ही फ्रांस ने भारतीय संसद द्वारा नागरिकता कानून में संशोधन को भारत का आंतरिक मामला करार दिया था जिसके बाद अब रूस का यह बयान सामने आया है। गौरतलब है कि रूस और फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के पी-5 सदस्य हैं।

दरअसल भारतीय संसद द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 को हरी झंडी देने के निर्णय पर मलेशियाई और पाकिस्तानी प्रधानमंत्रियों, मोहम्मद महाथिर और इमरान खान द्वारा भारतीयों को इस मुद्दे पर भड़काने की कोशिश की गई थी जिसके बाद रूस और फ्रांस भारत के समर्थन में सामने आए हैं।

भारत के नागरिकता कानूनों के संबंध में हाल के घटनाक्रमों पर अपना समर्थन व्यक्त करते हुए, भारत में रूस के उप-राजदूत रोमन बाबूसखिन ने कश्मीर से संबंधित मामलों पर भारत के लिए अपने देश के समर्थन का भी उल्लेख किया और कहा कि इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के प्रयासों के बजाय शिमला समझौते और लाहौर घोषणा के अनुसार ही भारत और पाकिस्तान के बीच के मामलों का निपटारा दोनों देशों द्वारा स्वयं ही किया जाना चाहिए।