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आरपीएफ ने ई-टिकटिंग घोटाले को किया उजागर, आतंकी वित्तपोषण से जुड़ा पाया

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने मंगलवार (21 जनवरी) को नई दिल्ली में काले धन को वैध बनाने और आतंकी वित्तपोषण के साथ जुड़े हुए टिकट घोटाले का पता लगाने का दावा किया है।

मीडिया को संबोधित करते हुए आरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) अरुण कुमार ने कहा, “हमारे द्वारा टिकट के दलालों के खिलाफ पिछले साल ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म शुरू किया जिसमें एक नाम, गुलाम मुस्तफा बार-बार हमारे रडार पर दिखाई दिया।”

मुस्तफा को इस साल की शुरुआत में भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया गया था और आरपीएफ ने उसके पास से दो लैपटॉप बरामद किए जिनमें एएनएमएस नाम का सॉफ्टवेयर था। कुमार ने कहा, “इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से उसने अवैध टिकटिंग को रोकने वाली बाधाओं को दरकिनार कर दिया जैसे कि कैप्चा और बैंक ओटीपी प्रदान करना।”

उन्होंने आगे कहा, “इसके बाद धोखेबाजों ने एकत्रित धन को क्रिप्टो मुद्रा में बदलकर विदेशों में भेजा।” “हमने दुबई में स्थित हामिद अशरफ नाम के एक व्यक्ति की पहचान की है और हमें संदेह है कि वह इस रैकेट का मास्टरमाइंड है।”, कुमार ने कहा।

मुस्तफा ने 563 व्यक्तिगत आईआरसीटीसी आईडी का भी उपयोग किया था जो कि एएनएमएस सॉफ्टवेयर और लगभग 3,000 बैंक खातों के माध्यम से कन्फर्म टिकट बुक करते हैं।

“उनके लैपटॉप के डिक्रिप्शन से पता चला कि वह पाकिस्तान स्थित टेबलक-ए-जमात का अनुयायी था और उसके कई पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, खाड़ी देशों, इंडोनेशियाई और नेपाली नंबर थे। उसके पास नकली आधार और पैन कार्ड बनाने का भी एक सॉफ्टवेयर था।”, डीजी ने कहा।

आरपीएफ ने एक सॉफ्टवेयर कंपनी की भी पहचान की है जो समूह से धन प्राप्त कर रही थी। सिंगापुर पुलिस द्वारा काले धन को वैध बनाने के लिए कंपनी की जाँच की जा रही है।

कुमार ने कहा, “हमने मुस्तफा से पूछताछ के आधार पर 27 लोगों को गिरफ्तार किया है।”

(आईएएनस की सहायता से प्रकाशित समाचार)