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“धर्म-संस्कृति जो हो पर संघ 130 करोड़ जनता को हिंदू समाज मानता है”- मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार ( 25 दिसंबर) को कहा, “संघ भारत की 130 करोड़ जनता को हिंदू समाज मानता है। फिर चाहे वे किसी भी धर्म और संस्‍कृति के हों। संपूर्ण समाज हमारा है और संघ का उद्देश्य संगठित समाज का निर्माण करना है।”

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना में तीन दिवसीय विजय संकल्प शिविर के दौरान मोहन भागवत ने कहा, “भारत माता का सपूत चाहे कोई भाषा बोले, चाहे किसी भी क्षेत्र का हो, किसी स्वरूप में पूजा करता हो या इस पर ना विश्वास करता हो, एक हिंदू है। इस संबंध में संघ के लिए भारत के सभी 130 करोड़ लोग हिंदू समाज के हैं।”

आरएसएस प्रमुख ने कहा, “आरएसएस सभी को स्वीकार करता है, उनके बारे में अच्छा सोचता है और उन्हें बेहतरी के लिए उच्च स्तर पर ले जाना चाहता है। यहाँ कहा जाता है कि विविधता में एकता पर हमारा देश इससे एक कदम आगे है। विविधता में एकता नहीं, केवल एकता की ही विविधता है। हम विविधताओं में एकता नहीं खोज रहे हैं, हम विविधता जिस एकता से निकली है, उस एकता को खोज रहे हैं।”

उन्होंने रविंद्र नाथ टैगोर का नाम लेते हुए कहा, “अंग्रेजों को लगता है कि जिन्हें हिंदू कहा जाता है वे दूसरे हैं और जिन्हें मुसलमान कहा जाता है, वे अलग हैं। वे आपस में लड़ेंगे और खत्म हो जाएँगे। अंग्रेजों याद रखो ऐसा कभी नहीं होने वाला है। ऐसे संघर्षों में से ही यह समाज उपाय ढूंढ लेगा।”